ज्ञान आलोक
अमिता मराठे
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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ज्ञान आलोक में रखना कदम
दिव्य कर्म करते रहना सहज।
कर्तव्य पथ सदा रहे निर्मल
संस्कार व्यवहार रहे सरल।
कर्म कल्याणकारी अनुकूल
अल्हादित ह्रदय रहे कोमल।
ज्ञान आलोक में रखना कदम
दिव्य कर्म करते रहना सहज
उदित सूर्य नित्य देता प्रकाश
सृष्टि को संतृप्त करना है काम।
संस्कार में बसे व्यवहार साफ
रवि की निःस्वार्थ अनवरत चाल।
ज्ञान आलोक में रखना कदम
दिव्य कर्म करते रहना सहज।
कर्तव्य पथ पर चलते रहना
ज्ञान गुणों का दान करना।
मर्यादा व आज्ञाओं में रहना
संतुष्ट मानव जीवन कहना।
ज्ञान आलोक में रखना कदम
दिव्य कर्म करते रहना सहज।
दृढ़ता से निश्चय बुध्दि बने
मनन चिंतन से पुष्प खिले।
कर्म से प्रथम स्व उत्कर्ष करें
स्व उत्कर्ष से नवनिर्माण करें।
ज्ञान आलोक में रखना कदम
दिव्य कर्म करते रहना सहज।
परिचय :- अमि...


