बाबा साहब
धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू
बालोद (छत्तीसगढ़)
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विपुल प्रतिभा के छात्र रहे,
माता-पिता के नाम कमाये।
देश का ऐसा मानव हुआ,
जो आज महामानव कहलाये।
विधि विधान का पालनकर,
लिखित संविधान जो रचाये।
नियम संयम का सृजनकर,
आज बाबा पूजनीय कहलाये।
जाति-पाति का भेद मिटाकर,
जो ज्योति किरणें बिखराये।
छुआछूत का खाई पाटकर,
समाज सुधारक वे कहलाये।
श्रमिक किसान मजदूर हितार्थ
हक और अधिकार दिलाये।
सामाजिक कुरीतियों से लड़कर
बाबा आज लोकप्रिय कहलाये।
मन मंदिर का दीप जलाकर,
मानवता का पाठ सिखलाये।
संत गुरुओं का सत्संग पाकर,
भीम बौद्ध धर्म अपनाये।
त्रिरत्न पंचशील संदेश गढ़कर,
जीवन अपना धन्य बनाये।
आष्टागिंक मार्ग में चलकर,
अहिंसा के पुजारी कहलाये।
बाबा के रास्ता को अपनाकर,
जिंदगी को जो स्वर्ग बनाये।
दुनिया में इतिहास रचकर,
संविधान के जनक कहलाये।
आज म...

