कोयल गीत
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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अलि कलियों को चूम रहे हैं,
कोयल गीत सुनाती है।
रंग-बिरंगी तितली देखो,
इठलाती इतराती है।।
बूढ़े बरगद की हम सबको,
शीतल-शीतल छाँव मिले।
गाँवों के खेतों को देखें,
मन में सुरभित पुष्प खिले।।
मंद-मंद बहती पुरवैया,
गीत प्रीति के गाती है।
अलि कलियों को चूम रहे हैं,
कोयल गीत सुनाती है।।
अमराई मधुरस छलकाती,
उपवन से सरगम निकले।
निर्मल जल से प्यास बुझाते,
हर दुख को हैं यों निगले।।
प्रेम रत्न की खान वहाँ पर,
मोती नेह लुटाती है।
अलि कलियों को चूम रहे हैं,
कोयल गीत सुनाती है।।
इन्द्रधनुष की छटा निराली
संध्या भी रहे सजीली।
झिलमिल रात बड़ी प्यारी है,
माटी होती गर्वीली।।
सच्चाई की सौगातें हैं,
सोंधी मिट्टी भाती है।
अलि कलियों को चूम रहे हैं,
कोयल गीत सुनाती है।।
स्वाभिमान है दंभ नहीं है,
मृदु ...

