
संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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भारत की सेना अमूल्य।
धरोहर है, हमारी।
एक-एक सैनिक
भारत मां के भाल के मुकुट का
सुंदर जड़ित हीरा है।
भारत की सेना अमूल्य
धरोहर है, हमारी।
सेना का एक-एक सैनिक
जोश, शौर्य, पराक्रम और
वीरता की गाथा होता
स्वयं मे।
भारत की सेना अमूल्य।
धरोहर है, हमारी
भारत माँ का
एक-एक सैनिक भारत मां के
हृदय की धड़कन है, उसकी
हर शवास-प्रशवास होती
भारत के लिए।
भारत की सेना अमूल्य
धरोहर है, हमारी।
भारत के सैनिकों के रक्त की एक-एक।
बूँद भारत मां की रक्षा हेतु।
बहती है।
भारत की सेना अमूल्य।
धरोहर हैं, हमारी
दुश्मन देशो पर टूट पड़ती है
कहर बन।
भारत की सेनाअमूल्य
धरोहर है हमारी।
चीन की लद्दाख में सैन्य।
झड़प में भारत के बीस
सैनिकों ने भारत मां की रक्षा हेतु
अपने प्राणों का बलिदान दिया।
भारत की सेना अमूल्य
धरोहर है हमारी।
अमूल्य धरोहर हमारी।
भारत मां का वीर सैनिक,
जीता है, भारत मां के लिए और
मृत्यु का आलिंगन भी करता है।
भारत मां की रक्षा हेतु।
भारत मां की सेना अमूल्य।
धरोहर है हमारी।
भारत का एक-एक सैनिक
अपनी सौगंध निभाता है,
कहता है, मैं तिरंगा फहरा कर आऊंगा।
या तिरंगे में लिपट कर आऊंगा।
परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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