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जिंदगी की डगर

प्रभात कुमार “प्रभात”
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)

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जिंदगी की हर डगर
तू रख हर कदम फूँक-फूँक कर।
नहीं आसान जिंदगी की कोई डगर
मिलेंगी चुनौतियाँ कदम-कदम,
करना है तुझे संघर्ष
जिंदगी की हर डगर ।
कभी होगी छोटी डगर तो
कभी काटे न कटने वाली
बड़ी लंबी नीरस सी होगी
जिंदगी की डगर।
राह ऐसी है कौन सी
जहाँ न हों शूल और पत्थर
जब-तक नहीं दर्द का अनुभव
कड़वी है सुकून की हर डगर।
तू तनिक भी न डर
साथ तेरा साया भी न दे अगर
हौंसले अपने बुलंद रख
तू राह में अकेला ही चल
पीना भी पड़े पानी खुद
कुआँ खोदकर।
तू चले जा अकेला ही निरंतर,
न रुक कभी जिंदगी के
पथरीले पड़ावों पर भी
मंजिल मिल नहीं जाती जब तक
तू चले जा फिर से
जिंदगी में नई डगर बनाकर।
कहते हैं मन के हारे हार है
तो फिर मन के जीते जीत भी
लेकर दृढ़ संकल्प हो निडर
तू सबके मन को जीत
जीवन लक्ष्य अंगीकृत कर
हर पल होकर सजग
अपने गंतव्य का चिंतन कर,
सफलता मिलेगी हर कदम
तब जिंदगी की हर डगर।

परिचय :-  प्रभात कुमार “प्रभात”
निवासी : हापुड़, (उत्तर प्रदेश) भारत
शिक्षा : एम.काम., एम.ए. राजनीति शास्त्र बी.एड.
सम्प्रति : वाणिज्य प्रवक्ता टैगोर शिक्षा सदन इंटर कालेज हापुड़
विशेष रुचि : कविता, गीत व लघुकथा (सृजन) लेखन, समय-समय पर समाचारपत्र एवं पत्रिकाओं में रचनाओं का निरंतर प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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