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नयी सी हवा है नया आसमां

डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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नयी सी हवा है नया आसमां
ठंडी हवा का दौर
चल रहा है।
मन तुमसे मिलने
को मचल रहा है।
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नयी सी हवा है
नया आसमां।
तुम आ जाओगे
तो बदलेगा समां।
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मौसम सुहाना है
हमने ये माना है।
सब कुछ छोड़कर
तुम्हे चले आना है।
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आसमां में बादल छाये है
हम तुमपे नजरे विछाये है।
अपना लो मुझको इसके पहले
कि कहीं मौसम बदल न जाये।
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इस समय जरुरत है धुप की
जो कुछ गर्मी दे जाय।
कड़कड़ाती ठंडी से
कुछ रहत दे जाये।
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मौसम बदल रहा है
तुम मत बदल जाना।
रोज की तरह
जरूर मिलने आना।
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हवाएं भले नयी है
हमारे संबंध पुराने है।
तुमसे से तो रोज मिलता हूँ
बाक़ी लोग अनजाने है।
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नयी हवा तुम्हारे
आगमन का संकेत दे रही है
पल-पल मुझे
बैचैन कर रही है।
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परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।

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