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तुम पर ही फ़िदा हूँ

अशोक कुमार यादव
मुंगेली (छत्तीसगढ़)

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मैं तुम्हें चाहता हूँ, तुम पर ही मर मिटा हूँ।
प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।।

धड़कनें कह रही हैं, कुछ सुनो तो ज़रा।
पास आओ ना तुम, दूर क्यों हो भला?
मन की बातें बता दूँ, वर्षों के बाद मिला हूँ।
प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।।

पास-पास हम हैं, मिलन की घड़ी आई है।
रंग-बिरंगे बाग दिखे, रुत ने ली अंगड़ाई है।।
खुशबू बिखेर दो ना, कुसुम बन खिला हूँ।
प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।।

तुम गीत बन जाओ, मैं संगीत बन जाऊँ।
तुम हो हमजोली, मैं कविमीत बन जाऊँ।।
लिख कर कविता, कल्पनाओं से घिरा हूँ।
प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।।

जीत की राहें, फैलाती हैं बाँहें, आ भी जा।
खुशी के पल, ना जाए ढल, मान भी जा।।
तुम हो बसंत बहार, मैं बदलती फ़िज़ा हूँ।
प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।।

परिचय : अशोक कुमार यादव
निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़)
संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक्ष यादव समाज सेवा, कला, संस्कृति एवं साहित्य उन्नयन समिति मुंगेली।
प्रकाशित पुस्तक : युगानुयुग
सम्मान : मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ पुरस्कार से सम्मानित, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, छत्तीसगढ़ हिन्दी रत्न सम्मान, अटल स्मृति सम्मान, बेस्ट टीचर अवॉर्ड।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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