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मैं भारत की नारी हूं

डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’
मंडला (मध्य प्रदेश)

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फूलों से कोमल मैं दिखती,
शोला और चिनगारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

घर आंगन को हूं महकाती,
पावन उपवन क्यारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

सृष्टि की मैं सुंदर सुंदरतम कृति,
लगती बड़ी ही प्यारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

सीता सति और सावित्री,
इंदिरा और गांधारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

अबला नहीं मैं सबला हूं,
हर नारी से भारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

सृष्टि की मैं ही हूं रचयिता,
जगत जननी प्यारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

करुणा और त्याग की मूरत,
संघर्षों से कभी न हारी हूं।
मैं भारत की नारी हूं।।

परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’
निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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