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नारी शक्ति की पहचान

प्रतिभा दुबे “आशी”
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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नारी साहस ही तो जग में नारी सम्मान
नहीं अबला नारी, नारी शक्ति की पहचान।।

ममता की धारा है नारी, दृढ़ता की मिसाल
उसकी हिम्मत के आगे हर मुश्किल बेहाल।।

कभी माँ बन कर जग को जीवन देने वाली
सृजनकर्ता हैं नारी, इस जग का आधार ।।

कभी बेटी बनकर हर आँगन को महकाती।
बहन रूप में स्नेह के दीप सदा ही जलाती।।

देकर आशीष सदा ममता लुटाने बाली स्त्री,
पत्नी बनकर जीवन पथ को सरल बनाती॥

अन्याय की आँधी से, संसार में छाए बदहाली
नारी ही दुर्गा बन जाए, रण में कहलाए काली।।

कलम उठाए तो, नारी नया ही इतिहास रचाए
अपने साहस से हर बंधन से नारी ने मुक्ति पाली।।

जिस घर में नारी का, सम्मान पुष्प खिला रहेगा
वहाँ सुख का हर दीप सदा ही, प्रज्वल होता रहेगा।।

इस समाज में, नारी सशक्त हो, हो प्रतिभाशाली,
तभी भविष्य भी उज्ज्वल होगा, गरिमामय होगी नारी।।

परिचय :-  श्रीमती प्रतिभा दुबे “आशी” (स्वतंत्र लेखिका)
निवासी : ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
उद्घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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