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बाबा अमरनाथ

किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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एक अनुभव- उज्जैन से कटरा कटरा से श्रीनगर होते हुए पहुंचे सोनमर्ग, सोनमर्ग बाबा अमरनाथ की 12यात्रा का पहला पडा़व। हम दो कपल पैदल यात्रा चालू की, यात्रा बहुत कठिन थी चलते गए और बाबा अमरनाथ को याद करते गए। बस ऐसा लग रहा था कि बाबा की गुफा आने वाली है पर हम चलते गए चलते गए बहुत थक गए, थोड़ा विश्राम किया खड़ी चढाई जब चालू हुई तो वहां किसी किसी को ऑक्सीजन की कमी हो जाती है हवा नहीं मिल पाती एक यात्री बहन घोड़े पर सवार थी। ऑक्सीजन कम होने पर वह घोड़े पर ही लेट गयी जब गिरने लगी तब घोड़े वाले को हमने आवाज लगाई ।
घोड़े से उतार और हमने उन पर कपूर का लेप किया नाक पर कपूर को मसला तब उनकी स्वास सामान्य हूई। हम भी वहां से घोड़े पर सवार हो गए बड़ी कठिन चढ़ाई पार करने के बाद हम पहुंचे बाबा बर्फानी के धाम पर एक बड़ा ही रोचक और अकाल्पनिक या बाबा का आशीर्वाद घटना घटित हुई। हम बाबा की गुफा से करीबन आधा किलोमीटर दूर थे बाबा के दर्शन के लिए आतुर थे। मेरी आंखों से आंसू नहीं जा रहे थे की बाबा हम बहुत दूर से आए हैं हमें दर्शन देना आर्मी बहुत अच्छी है उन्होंने बोला दीदी आप रोओ मत हम आपके दर्शन कराएंगे। हम पहुंचे बाबा की गुफा से २० मिनट का रास्ता था और अनाउंसमेंट हो गया की ४:०० बजे गुफा के पट बंद हो जाएंगे और सभी यात्री पंचदारनी पर पहुंचे तभी यात्री पंचतंत्र में चलने लगे हमारे साथी लोग भी बोले अब हमें भी चलना चाहिए मिले कहां में बाबा के दर्शन के बिना नहीं जाऊंगी आप सब भले जाए। इस वक्त बाबा की ऐसी कृपा रही की वापस से अनाउंसमेंट हुआ कि आज बाबा की गुफा शम ७:०० बजे तक चालू रहेगी। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा हम जल्दी-जल्दी बाबा की गुफा तक पहुंचे और हमने ३ फिट की बाबा के शिवलिंग का दर्शन किया हमने कबूतर का जोड़ा भी देखा आधा घंटा रुके वहां से हम चल दिए सभी के शूज वहां पानी कीचड़ में और ढेर में मिल नहीं रहे थे। हम वहां से शाम हो रही थी वैसे ही चल दिए मेरे पतिदेव ने वहां से नए शूज़ लिए और मेरे साइज के नहीं मिले मैं वैसे ही जल्दी बिना शूज की आधा किलोमीटर चली तभी सामने से एक सुंदर सा हाइट अच्छी लंबी-लंबे बाल सुंदर सा चेहरा अपने दोस्त के साथ हाथों में चप्पल लिए सामने आया और बोला अरे दीदी अपने चप्पल नहीं पहने इतनी यहां पर इतनी बर्फ है सर्दी है आप यह चप्पल पहन लीजिए। मैंने कहा यह चप्पल आपके किसी की होगी आप ले जाइए तभी वह बोला नहीं मेरी माताजी ऊपर बैठी है यह चप्पल आप पहन लीजिए मुझे अपने हाथों से स्लीपर चप्पल पहन कर गया और मैं देखती रह गई कि यह कौन आया जो मेरे लिए चप्पल लेकर आया और आगे चलकर देखा तो वह न जाने कहां चले गए ओझल हो गए। मेरे लिए तो एक बहुत बड़ा प्रभु का इशारा था वह मुझे चप्पल के बहन ए दर्शन देने के लिए वहां आए और मेरा जीवन धन्य हो गया। प्रभु के दर्शन करके में समझ गई कि यह भोलेनाथ ही मुझे दर्शन देने के लिए यहां आए थे, फिर तो पूरी रात चल कर हम अपने गंतव्य पर पहुंचे पर वह दृश्य आज भी मेरे आंखों से कभी ओझल नहीं होता वह मुझे आज भी अपने सामने खड़े दिखते हैं जय हो बाबा बर्फानी मेरी आंखों देखी।

परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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