
अखिलेश राव
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मां के श्री चरणों में मातृ दिवस पर शब्दांजली
माँ पर लेखन कोई आन नहीं
मां पर लेखन कोई मान नहीं
मां पर लेखन कोई सम्मान नहीं
मां पर लेखन कोई स्वाभिमान नहीं
अथक प्रयासों का भी कोई भान नहीं
मां पर लिखना आसान नहीं
मां पर लिखना आसान नहीं।।कैसे लिक्खूं जिससे
तुतलाती भाषा सीखी है
कैसे लिक्खूं जिससे
जीवन परिभाषा सीखी है
कैसे लिक्खूं जिससे
आशा ही आशा सीखी है
कैसे लिक्खूं जिससे
प्रेम नेह अभिलाषा सीखी है
सहज सरल अभिव्यक्ति का
मुझको भान नहीं
मां पर लिखना आसान नहीं।।बिन मां के बच्चा
खड़ा नहीं होता है
बिन मां के बच्चा
बड़ा नहीं होता है
बिन मां चुनौती समक्ष
अडा नहीं होता है
मां का संबंध नो माह
सभी से बड़ा होता है
सुख-दुख ममता करूणा
का ध्यान नहीं
मां पर लेखन कोई आसान नहीं।।मां प्रभुसत्ता पूजा
भक्ति आराधन है
मां जगत पूर्ण संसाधन हैं
मां की छबि सुंदर मनभावन है
मां जीवन की शीतलता
और खुशियों का आंगन है
मात्रा अक्षर रस
छंद का संज्ञान नहीं
मां पर लेखन कोई आसान नहीं
मां पर लेखन आसान नहीं।।
परिचय :- अखिलेश राव
सम्प्रति : सहायक प्राध्यापक हिंदी साहित्य देवी अहिल्या कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय इंदौर
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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