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अग्रगण्य बजरंगबली हैं

अंजनी कुमार चतुर्वेदी “श्रीकांत”
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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अग्रगण्य बजरंगबली हैं,
अतुलित बल पाया है।
माता सीता पुत्र मानतीं,
रघुवर का साया है।

अग्रगण्य जो हैं दुनिया में,
उनका वंदन होता।
पर उपकारी का दुनिया में,
है अभिनंदन होता।

अग्रगण्य हैं श्री गणेश जी,
घर-घर पूजे जाते।
शुभारंभ में गौरा सुत को,
मिलकर सभी मनाते।

अग्रगण्य गुरुवर समाज में,
अंधकार को हरते।
सिखा ककहरा, हृदय शिष्य के,
ज्ञान उजाला करते।

अग्रगण्य ऋषि मुनि सन्यासी,
हमें सुपथ दिखलाते।
जीवन जीने का कौशल भी,
हमें सदा सिखलाते।

माता अग्रगण्य गुरुओं में,
जीवन सुखमय करती।
प्रथम पाठशाला बनाकर माँ,
ज्ञान हृदय में भरती।

जो सेवा में अग्रगण्य हैं,
उनको मिलता मेवा।
सेवक की रक्षा करते हैं,
सदा गजानन देवा।

अग्रगण्य बनकर जीवन को,
हम खुशहाल बना लें।
जो रूठे हैं स्वजन हमारे,
चलकर उन्हें मना लें।

परिचय :अंजनी कुमार चतुर्वेदी “श्रीकांत”
निवासी : निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.एस.सी एम.एड स्वर्ण पदक प्राप्त
सम्प्रति : वरिष्ठ व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक २ निवाड़ी
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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