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हिंदी में संस्कृति मुस्काती है

याशिका दुबे
इंदौर (मध्य प्रदेश)

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विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना

हिंदी केवल शब्दों
की रचना नहीं,
यह सभ्यता की
साँसों का प्रमाण है।
ऋषियों की वाणी से
जन-जन के मन
तक पहुँचा संवाद है।
यह वेदों की
गंभीरता भी है,
और लोकगीतों
की मधुर तान।
यह तुलसी की मर्यादा,
और कबीर का
निर्भीक ज्ञान।
हिंदी में संस्कार पलते हैं,
हिंदी में संस्कृति मुस्काती है
सरल होकर भी कालजयी,
हिंदी विश्व में भारत की
पहचान बन जाती है।

परिचय : याशिका दुबे
निवासी :
इंदौर (मध्य प्रदेश)

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