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मुझे मेरा गाँव याद आता है

पुष्पा खंगारोत
जयपुर (राजस्थान)
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मुझे मेरा गाँव याद आता है
वह बचपन याद आता है,
जब तितलियों से उड़ते फिरते थे,
वह मौसम याद आता है।।

ना कोई रोक थी
ना कोई टोक थी,
हर लम्हा हम खुद मे जिया करते थे,
याद आता है वो बचपन जब हम गाँव मे रहते थे।।

ना किसी कदम पर कोई खतरा था
ना माँ की आँखों का पहरा था,
ना बाबा परछाई से घुमा करते थे
ना कलाई पर भाई की पकड़ थी
याद आता है वह बचपन…।।

याद आती हैं वो गलियां
जिनमे बचपन फूलों सा खिलता था
हर नजर मे हमारा एक अपना सा
रिश्ता हुआ करता था, कोई हमे बहन
तो कोई बिटिया कहा करता था।।
याद आता है वो…।।

बदल गया मेरा गाँव
अब तो लोग भी बेगाने लगते है,
कोई दो कदम साथ भी चले
तो हम घबराने से लगते है।।
कोई अगर पूकार भी ले
हमे तो हम घबराने लगते है।।
याद आता है मेरा गाँव…।।

परिचय : पुष्पा खंगारोत
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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