
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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मैं…
मैं था कभी..
मेरा स्वाभिमान..
मेरा दंभ
मगर… अब
मै कहाँ रह गया हूँ मैं……
तरंग विहीन
उमंग विहीन
धड़कते स्पंदनों के
घेरे से बाहर
नाना रूपी
विलग स्वरूपी
संवेदनाओं से ऊपर उठ कर
स्वप्न सागर में
तैरने का अहसास लिए
मैं हूँ
पर प्रश्न है… क्या मैं हूँ…?
मिचमिचाते तारों भरे
नील गगन में
मटमैले से प्रकाश में
चंदा विहीन
तारा पूरित नभ
पर शायद अमावस्या है
भाव विहीन भावों के
गहन समंदर में
तिरोहित भाव लिए
मैं हूँ
पर प्रश्न है… क्या मैं हूँ…?
चलाचल के समागम में
हरित वसुंधरा पर
ढह गई मानवीय सोच
सभ्यता और संस्कृति
विरासत के गुण
बह गये आडंबरीय सैलाब में
भौतिकता की मोह धारा में
चमकता मार्तंड
जगाता है विश्वास
पर कैसे मानूं…
फिर भी अस्तित्व है मेरा
पर प्रश्न है… क्या मैं हूँ…?
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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