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खामोशी पढ़ लेता है

डॉ. विजय गुप्ता “मुन्ना”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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चादर से बाहर पैर जाहिर चलन अब खास हो गया,
मगर सटीक ज्ञानवान बोली मितभाषी गढ़ लेता है।

शिखर पहुंचने के निज तरीकों में सभी होते माहिर,
बचपन से पचपन सफर तक प्रियभाषी बढ़ लेता है।

चुनौती संघर्ष मेहनत औजार से सुंदर बुत बना लिए,
बेहतर मनुज बनने खुद में ही नक्काशी मढ़ लेता है।

कथन श्रवण दर्शन सतत रवायत बने बैठे सबूतों के,
नेपथ्य इंसा गुमान देखिये जो खामोशी पढ़ लेता है।

होशोहवास में अच्छे बुरे काम का अंजाम है जिंदगी,
अनमोल किरदार वो जब छाई बेहोशी लड़ लेता है।

कामयाबी का पद पदक पदवी देखता है सारा जहां,
बेहद सुखद मंजर जब महज शाबासी चढ़ लेता है।

चुनाव में हर चेहरा मोहरा भी खास अहमियत रखे,
बदमाशी ऐयाशी फितरत संग प्रत्याशी लड़ लेता है।

परिचय :- डॉ. विजय कुमार गुप्ता “मुन्ना”
जन्म : १२ मई १९५६
निवासी : दुर्ग छत्तीसगढ़

उद्योगपति : १९७८ से विजय इंडस्ट्रीज दुर्ग
साहित्य रुचि : १९९७ से काव्य लेखन, तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल जी द्वारा प्रशंसा पत्र
काव्य संग्रह प्रकाशन : १ करवट लेता समय २०१६ में, २ वक़्त दरकता है २०१८
राष्ट्रीय प्रशिक्षक : (व्यक्तित्व विकास) अंतराष्ट्रीय जेसीस १९९६ से
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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