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सिलसिला
कविता

सिलसिला

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** मोहब्बत का सिलसिला थम सा गया है। नफरतों का सिलसिला बढ़ सा गया है। सोचा था जी नहीं सकेंगे तुम्हारे बिन। मगर जीवन का सिलसिला बढ़ सा गया। फिर सोचा चलो जीवन की एक नई शुरुआत करते। मगर बनावटी ख्वाबों का सिलसिला बढ़ सा गया। फिर सोचा चलो बनावटी ख्वाबों के सहारे ही जीवन जी लेते है मगर तन्हाई का सिलसिला फिर से बढ़ सा गया। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्र...
क्रांतिकारी कवि राम प्रसाद बिस्मिल
कविता

क्रांतिकारी कवि राम प्रसाद बिस्मिल

डॉ. पंकजवासिनी पटना (बिहार) ******************** मूलमती-मुरलीधर की बगिया खिला फूल इक राम! आजादी इतिहास में तरुण क्रांतिकारी सरनाम!! बिस्मिल तेजस्वी कवि, शायर औ क्रांतिकारी प्रखर! हा अमर बलिदानी विस्मृत! कृतज्ञ बनो राष्ट्र दो स्वर!! जन्म शाहजहांपुर, गोरखपुर जेल में अंत जीवन! जर्जर संरक्षित बिस्मिल कक्ष! करो धरोहर संरक्षण!! आर्य समाज से जुड़े सत्यार्थ प्रकाश का किया मनन! स्वाध्याय नियमित व्यायाम संग सुबह शाम हवन!! बिस्मिल की थी इकहि चाह हर जन्म भारत में पाऊंँ! प्रेम हिंदी से हो अतुल! ओढूँ हिंदी औ बिछाऊँ...!! उर में नहीं भड़कते थे सिर्फ आजादी के शोले! कविता और शायरी की भाषा कलम उनकी बोले!! चौरा-चौरी कांड बाद कांँग्रेस ली वापस असहयोग आंदोलन! तो जुड़े राम हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन!! चंद्रशेखर आजाद नेतृत्व यहांँ सशस्त्र क्रांति! हुआ बिस्मिल का मोह भंग कांँग्रे...
सफर
कविता

सफर

अमिता मराठे इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जिन्दगी के सफर में, समानांतर चलते जाना, एक सुहावना अवसर है। जो संकटों से टकराते, जीवन यात्रा के, सुगन्धित पुष्प महकाते हैं। कैसी भी हवा हो, तेज आंधी-तूफान हो, अचल अडोल रहना है। गतिशीलता ही रफ्तार है, नये उत्साह से जुड़ना है। पुरूषार्थ भाव निर्मल हो, कुछ करने की दृढ़ता से, लक्ष्य तक पहुंचना है। प्रतियोगी देखकर, द्वेष, क्लेश में ना फंसना है। ये सफर है मौज में, सूरज चांद सा चमकना है। मुसीबतों का आना, तय है इस जीवन में, सामना किए बिना, मंजिल पा नहीं सकते। इस अविनाशी सफर में, डेरा कहीं भी डालें, अदृश्य शक्ति के बल पे, मार्ग प्रशस्त करना है। जिन्दगी के सफर में, समानांतर चलते जाना, एक सुहावना अवसर है। परिचय :- अमिता मराठे निवासी : इन्दौर, मध्यप्रदेश शिक्षण : प्रशिक्षण एम.ए. एल. एल. बी., पी जी डिप्लोमा इन वेल्...
करते करते क़िस्सागोई
ग़ज़ल

करते करते क़िस्सागोई

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** करते करते क़िस्सागोई। हमनें सच्ची बात डुबोई। मन ने धीरज रख्खा लेक़िन, आँख हमारी झर-झर रोई। जाग रहे थे हम ही तन्हा, जब थी सारी दुनियाँ सोई। आज वही हम काट रहें हैं, फ़सल वही जो हमनें बोई। भूल गए अब वो ही हमको, हमने जिनकी याद सँजोई। कान सुनी या आँखों देखी, बात हमारी माने कोई। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं...
कल्पनाओं में
कविता

कल्पनाओं में

जयप्रकाश शर्मा जोधपुर (राजस्थान) ******************** कल्पनाओं में जीना संभव है परंतु हकीकत में जीना कठिन है जीवन एक नदी है इसे पार सबको करना है परंतु माझी के भरोसे भी नहीं रहना है अगर जीवन की नदी पार करनी हो तो स्वाबलंबी बनना जरूरी है कब तक माझी के भरोसे नैया पार करेंगे खुद को भी तो पुरुषार्थ करना है कल्पना करना अच्छी बात है परंतु पुरुषार्थ खुद को करना है परिचय :- जयप्रकाश शर्मा निवासी : जोधपुर (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप...
जीवन साथी
ग़ज़ल

जीवन साथी

अख्तर अली शाह "अनन्त" नीमच (मध्य प्रदेश) ******************** सब का तन जीवन साथी है, सब का मन जीवन साथी है। होता परिवर्तन पल-पल पर, परिवर्तन जीवन साथी है।। जिस पर खेला बचपन मेरा, सर्दी गर्मी बरसात सही। ना भूला हूँ उस आंगन को, वो आंगन जीवन साथी है।। पानी से दूर रहा कब मैं, पानी है मेरे जीवन में। जल जीवन है सब देख रहे, जल का धन जीवन साथी है।। सांसो की सारी माया है, आती जाती हर सांस कहे। वायू का जीवन मैं होता, जो नर्तन जीवन साथी है।। गर्मी जीवन का लक्षण है, ठंडा होना मर जाना है। अग्नि का दामन छूटा कब, ये दामन जीवन साथी है।। है गगन नहीं कुछ भी लेकिन, ये अंश मगर मानव का है। संतुलित रखें जो अंशों को, वो पावन जीवन साथी है।। हम सफर रहा वो बनकर के, पग-पग पर साथ दिया मेरा। वो भी जीवन साथी, उसका, अपनापन जीवन साथी है।। परिचय :- अख्तर अली श...
घमंड
कविता

घमंड

संध्या नेमा बालाघाट (मध्य प्रदेश) ******************** किस बात का घमंड मेरा घमंड बार-बार मुझे ललकारता हैं। तेरा हैं क्या जो घमंड कर सकती हैं। जन्म मरण भगवान के हाथ फिर तेरा है क्या, किस बात का घमंड... मेरा घमंड बार... मां-पिता के संस्कार भाग्य किस्मत का लिखा जोक फिर तेरा है क्या, किस बात का घमंड... मेरा घमंड बार... विद्या-धन और मान-सम्मान दूसरो से प्राप्त फिर तेरा है क्या, किस बात का घमंड... मेरा घमंड बार... ये शरीर भी मिट्टी का और एक दिन मिट्टी में समा जाएगा फिर तेरा है क्या किस बात का घमंड... मेरा घमंड बार... मेरा घमंड बार-बार मुझे ललकारता हैं। तेरा हैं क्या जो घमंड कर सकती हैं। राधे राधे... परिचय : संध्या नेमा निवासी : बालाघाट (मध्य प्रदेश) घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करती हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी...
स्त्री चिंतन
कविता

स्त्री चिंतन

डॉ. मोहन लाल अरोड़ा ऐलनाबाद सिरसा (हरियाणा) ******************** स्त्री का अस्तित्व है महान माँ बनना भी है सम्मान सब जगत पर है अहसान कब हटेंगे यह इश्तहार बड़े अस्पतालों से यहाँ लिंग परीक्षण नहीं किया जाता सालो से पुत्र जन्म पर दी जाने वाली बधाईयाँ बेटी जन्म पर मिलने वाली रूसवाईयाँ कोई बात नहीं आजकल बेटा-बेटी एक जैसे है यह कहना आसान परंतु मन से सब वैसे है फिर ना नोच कर फेंक दी जाए गटर मे कोई बच्ची जो नवरात्रो में पुजी गई थी देवी सच्ची दोहरी हुई पीठ पर बच्चा बाँध कर इंटो और सीमेंट को कंधे पर लाद कर चढती हुई गरीब औरत ना तौली जाए ठेकेदार की नजरो में ना बोली जाए फिर से ना किसी अबला पर गोली चलाई जाए ना तेजाब से राह चलती खुबसुरत शक्ल जलाई जाए नहीं कर सकते किसी स्त्री का सत्कार बड़ा ही घिनौना और आपराधिक है बलात्कार घर से बाहर निकलने पर घुरती गंदी निगाहे बेच...
साहित्य के धरातल पर
कविता

साहित्य के धरातल पर

गगन खरे क्षितिज कोदरिया मंहू (मध्य प्रदेश) ******************** साहित्य के धरातल पर भावनाएं ही सुन्दर प्रेरणा बनकर जन्म लेती हैं। दिल को छूले मन को सुकून मिलता हैं और जनमानस की प्रेरणा बन जाती हैं मेरी कलम। सृजनकार हर परिस्थितियों में अपनी पहचान बना लेता है। जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि, जहां चाह नहीं वहां जीने की राह निकल लेता कवि और प्रेरणा बन जाती हैं मेरी कलम। चमत्कार तो नहीं करतीं जिम्मेदारी का एहसास कराती, बहुत नाज़ है उस पर अद्भुत हैं कलम मेरे लिए भगवान बन गई हैं मेरे लिए मेरी कलम। मां बहन बेटी की तरह वह एक पिता की जिम्मेदारी का अहसास कराती सांसारिक धरातल पर प्रेरणा स्वरूप हैं मेरी कलम। विपत्तियों से घिर गई है ज़िन्दगी, हैवानियत का शिकार हो गई मासूम जिन्दगी, और तो और महामारी करोना से लाशों का ढेर बन गई हैं जिन्दगी व बेबस हो गई ...
दीप अभी तुम जलते रहना
कविता

दीप अभी तुम जलते रहना

मंजुला भूतड़ा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** विश्वास के पात्र में स्नेह शेष है, मन की बाती में अपनत्व विशेष है, प्रफुल्लित होंगे सब जन-मन, निखर उठेगा अंधियारा आँगन। विचारों के झंझावात हैं, उद्वेगों के तूफान हैं, पर शीतल झोंकों के रहते, पल रहा विश्वास है। अदृश्य कालिमा को दूर भगाने, मन के आक्रोशों को हटाने, जनमानस में आस जगाने, दीप अभी तुम जलते रहना। महामारी विकराल है, कोरोना का बवाल है, अदृश्य आपदा से मुक्ति दिलाने, दीप अभी तुम जलते रहना। परिचय :-  मंजुला भूतड़ा जन्म : २२ जुलाई शिक्षा : कला स्नातक कार्यक्षेत्र : लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता रचना कर्म : साहित्यिक लेखन विधाएं : कविता, आलेख, ललित निबंध, लघुकथा, संस्मरण, व्यंग्य आदि सामयिक, सृजनात्मक एवं जागरूकतापूर्ण विषय, विशेष रहे। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक समाचार पत्...
वक्त
कविता

वक्त

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** वक्त चलता है दौड़ता है भागता है पर वक्त की परछाई तनहाई नहीं होती क्योंकि तनहाई में वक्त डरावना लगता है सदा मुस्कुराता हुआ आगे निकल जाता है कोई पकड़ पाता है और कोई नहीं पकड़ पाता इस वक्त हंसता हुआ आगे निकल जाता है पर वक्त तंहा नहीं होता कहीं करुणा रस बरसाता कहीं विभत्स तो कहीं आज आश्चर्य तो कहीं वक्त वीर रस में नहाया। मन दौड़ता है मनु को पीछे छोड़ने के लिए। परंतु विवेकी वक्त का मूल्य समझ ने वाले समय को अपनी मुट्ठी में बंद कर नीत नए अनवेषण कर आगे बढ़ता है वह वक्त को पकड़ने का प्रयास करता है की फिर कुछ नया कर सके तंहा ही वक्त का मुंह चिढ़ाती है सरिता सार के किनारे का वक्त भागते मैं गुनगुनाते हुए दुखी मन को आश्वस्त करता है वक्त कब रात की काली चादर होता है पता नहीं चल पाता दौड़ो भागो वक्त के ...
मेरी पसंद
कविता

मेरी पसंद

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ******************** मुझे बातें पसंद हैं इंसान की न हिंदू की न मुसलमान की। कहो, रोटी, कपड़ा और मकान से क्या कभी कोई अलग है या पेट से पहले किसी की अन्य तलब है। खून का रंग भी तो लाल ही है फिर भी रात दिन भेद का ख्याल ही है। ये हरकत है किस नादान की मुझे बातें पसंद... न हवा बदलती,न सूर्य न चन्द्रमा फिर न जाने खुद को अलग मानने का है क्यों गुमां। भेद तो कभी धरती ने भी नही किया। वही एक भंडार भोजन सबको दिया। फिर बुद्धि क्यो फिरी बुद्धिमान की मुझे बातें पसन्द है,,,, न धर्म बुरा न मजहब बस भाषा का ही भेद है। अब तक भी न समझ सके यही तो खेद है। कहाँ ग्रन्थों ने करी है अनैतिकता की प्रशंशा किस धर्म ने जाहिर की भेद भाव की मंशा। धर्म के ठेकेदार करते क्यों बातें अंजान सी मुझे बातें पसंद है। परिचय :- रश्मि लता मिश्रा निवासी : बिलासप...
जब खत को लीखा
कविता

जब खत को लीखा

मनमोहन पालीवाल कांकरोली, (राजस्थान) ******************** पहली बार जब खत को लीखा खत में तेरी मुहब्बत को लीखा खत में यारो मैने भी अपनी कहीं उन सब हकीकत को लीखा कट जाता है वक्त मेरा बातों मे मेरे उस उल्फ़त को लीखा याद है वो सब बातें तुम्हारी उन बातों की शरारत को लीखा पहले नज़र मीली तुमसे यहाॅ उसमे अपनो चाहत को लीखा इश्क़ खुदा की सौगात हैं यारों उस में मेरी इबादत को लीखा जब वक्त आया इज़हार का, राहों की कयामत को लीखा वो ख़त जब सरे आम हुआ था मैने दिल की आहत को लीखा खुदा के दर कबूल हुई दुआ मोहन आहसास- ए- इशरत को लीखा मेरी मंजिल मुकम्मल हुई "मोहन" ख़त मे अपनी किस्मत को लीखा परिचय :- मनमोहन पालीवाल पिता : नारायण लालजी जन्म : २७ मई १९६५ निवासी : कांकरोली, तह.- राजसमंद राजस्थान सम्प्रति : प्राध्यापक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता ...
स्त्री नियमो की सीमा को क्यों लांघ न पाए?
कविता

स्त्री नियमो की सीमा को क्यों लांघ न पाए?

गरिमा खंडेलवाल उदयपुर (राजस्थान) ******************** अतीत के विकृत संकल्पो, की मिथ्या परछाई ने, उन्नति के पथ पर रोडे अटकाए, जाने क्यों ? स्त्री थोथे नियमो की सीमा को लांघ ना पाए। ब्रह्मांड में जो कुछ भी चलायमान, उत्पत्ति निर्माण में स्त्री का योगदान उपलब्धियों पर हीन दृष्टि पाए जाने क्यों ? स्त्री अपनी शक्ति को, पहचान न पाए। शून्य जगत का हर कोना गति पाता स्त्री के तप से वही जगत से हेय दृष्टि पाए जाने क्यों ? स्त्री अभिमानियों के मिथ्या दम को मिटाना चाह ना पाए। नियम वर्जनाओ की बेड़ियों मे भी सृजन व पालन की ताकत, मानस पटल पर भय शंका बढ़ाएं, जाने क्यों ? स्त्री अपनी पीड़ा को, बतला न पाए। जग स्त्री उपलब्धियों को पचाना पाए, कमी निकालने से बाज ना आए, टूटता स्त्री मनोबल षड्यंत्रों में फंस जाएं, जाने क्यों ? स्त्री अपनी विवशता को समझ न पा...
नारी की व्यथा
कविता

नारी की व्यथा

डॉ. पंकजवासिनी पटना (बिहार) ******************** हे पुरुष...! तेरी चौखट पे खड़ी सदियों से प्रतीक्षारत स्त्री हूंँ मैं...!!! खुद में रेशा रेशा पिरोती तुझे...! सांँस-सांँस में महसूसती तुम्हें...! धड़कन-धड़कन में समाती तुझे... ! खुद को कतरा-कतरा पिघलाती तुझमें... ! रोम-रोम से समर्पित तुझ पर! खुद को तेरी हर चाह पर न्योछावर करती...! रही न मैं! बन कर रह गई परछाई भर तेरी!! बस एक नन्हीं-सी चाह मार न सकी! और ताक रही तुझे एकटक... !! कब झरेगा झरने सा झर झर झर झर... तेरी दृष्टि से अनुराग सिर्फ मेरे लिए!!! परिचय : डॉ. पंकजवासिनी सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय निवासी : पटना (बिहार) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, ल...
उपेक्षित उर्मिला
कविता

उपेक्षित उर्मिला

बृजेश कुमार सिंह करण्डा, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) ******************** साहित्य भरा पड़ा हुआ है बहुतों के व्यर्थ सम्मान से, आओ लेखनी को धन्य करें उपेक्षित उर्मिला के गान से..!! राम संग वन गमन हेतु तैयार हुए थे जब लक्ष्मण.. उर्मिला ने भी संग चलने का प्रस्ताव रखा था तत्क्षण.. माताओं-परिजनों को प्राणप्रिये तुम्हारी है बहुत जरूरत.. लक्ष्मण ने वन न जाने के लिए उर्मिला को कर लिया सहमत.. सुमित्रानंदन ने उर्मिला से यह ले लिया वचन.. भूलकर भी आंसू नहीं लाएंगे ये तेरे नयन.. अपने ही दुख में गर तुम डूबी रहोगी.. माताओं-परिजनों का ख्याल तब कैसे रखोगी.? बंध गया अगाध यौवन अशिथिलनीय प्रतिमान से.. आओ लेखनी को धन्य करें उपेक्षित उर्मिला के गान से..!! कितना शूलकारी रहा होगा नव विवाहिता के लिए वह छन, जब प्राणाधार जा रहे हो चौदह वर्षों के लिए वन.. वह महाविदाई का कठिन समय ...
कब से मदन रहा है सींच
कविता

कब से मदन रहा है सींच

माधवी मिश्रा (वली) लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** खिलते फूलों की खुशबू से महक रहा था मेरा मन चटक चाँदनी की किरणों से रश्मित था घर का आँगन जुही चमेली बेला गुढ़हल ओढ़े फूलों की चादर रात लजाती आई थी तू जग मग था सब अगर डगर चंदन की तब शोख महक ने कानो मे कुछ बोल दिया ज्यों भवरे की पंख ध्वनि ने बंशी का रस घोल दिया। कोमल कलियाँ फूल बन गयी थिरक रहीं सूरज के संग कमल कुमुदनी उठी उनींदी भूल गयीं रातो का रंग इंद्र धनुष की सतरंगी डोरी से जैसे बँधे हुए फूलो की अनगुथ वेड़ी ज्यों हो केशो मे सजे हुए आई थी मृदु विमल विभा सी रज्जु रथी तुम बन करके ज्यों हीरक तारावलियाँ उतरें भू पर छन कर के। सजा हुआ रति भवन सरीखा मंडप नभ के बीचों बीच फूलों सी नभ मन्जरियों को कब से मदन रहा है सींच। परिचय :- माधवी मिश्रा (वली) जन्म : ०२ मार्च पिता : चन्द्रशेखर मिश्रा पति ...
खुशी से मिली नई खुशी
संस्मरण

खुशी से मिली नई खुशी

मंजू लोढ़ा परेल मुंबई (महाराष्ट्र) ********************  घटना अप्रैल २०१९ की है मुंबई के अपर वर्ली इलाके मे स्थित आवासीय इमारत लोढा वर्ल्ड टॉवर्स मे जैनों के बारहवें तीर्थंकर, भगवान वासूपुज्य स्वामी के हमारे नए मंदिर का अंजनशलाका प्रतिष्ठा समारोह था, मंदिर में प्रभु की प्रतिमाओं का प्राण प्रतिष्ठा का समारोह था। यह चार दिवसीय कार्यक्रम बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम में मैं और मेरे पति मंगल प्रभात लोढ़ा जी ने परंपरा अनुसार प्रभु के माता-पिता का पात्र निभाया। हमारी बड़ी पोती यशवी उस प्रतिष्ठा समारोह में प्रियंवदा दासी का पात्र निभा रही थी। इसी दौरान यशवी से उसके दादाजी बोले- ‘यशवी, मैं और आपकी दादी प्रतिष्ठा महोत्सव में राजा रानी, प्रभु के माता-पिता का पात्र निभा रहे हैं, तो आप राजकुमारी यानी भगवान की बहन का पात्र निभा लो।" तो, उ...
भाई
कविता

भाई

संध्या नेमा बालाघाट (मध्य प्रदेश) ******************** भाई शब्द ही दुनिया में बहुत अनमोल हैं भाई छोटा हो या बड़ा पऱ बहन को हमेशा छोटा ही समझता हैं मेरी वो हिम्मत हैं मेरा वो सहरा हैं भाई मेरा मेरी जान से भी प्यारा हैं समय आने पऱ जो बहन से लड़ता हैं और बहन को कोई उफ़ तक कर दे तो पूरी दुनिया से लड़ता हैं मेरी वो हिम्मत हैं मेरा वो सहारा हैं भाई मेरा मेरी जान से भी प्यारा हैं खुद धूप खड़े बहन को छाँव देता हैं खुद कितनी भी मुसीबत में हो पऱ बहन के सामने हमेशा मुस्कुराता मेरी वो हिम्मत हैं मेरा वो सहारा हैं भाई मेरा मेरी जान से भी प्यारा हैं मेरा दुश्मन भी तू मेरा दोस्त भी तू मेरे लिए मुसीबत भी तू उसका हल भी तू भाई बहन से कभी नहीं नाराज होता हैं मेरी वो हिम्मत हैं मेरा वो सहारा हैं भाई मेरा मेरी जान से भी प्यारा हैं मुझ पऱ आती हैं मुसीबत तो वो संभाल लेता हैं पी...
प्यार का भूखा
बाल कहानियां

प्यार का भूखा

राजनारायण बोहरे इंदौर मध्य प्रदेश ******************** रिंकू को तेज बुखार था और वह बिस्तर पर अकेला रो रहा था। सुबह जब उसके पापा अपने दफ्तर जाते समय रोज की तरह रिंकू के कमरे में आये तो पापा से बड़े दबे से अंदाज में उसने कहा था- ’’पापा मुझे कल रात से बहुत तेज बुखार है। प्लीज आज आज आप घर पर रहिये न।’’ पापा ने हमेशा की तरह उसकी प्रार्थना को ठुकरा दिया था- ’’नो रिंकू, इस तरह कमजोर नहीं बनते। तुम्हें मजबूत बनना है- एकदम स्ट्रांग। ये छोटे मोटे बुखारों से भला क्या घबराना। आज मेरे ऑफिस में बहुत जरूरी मीटिंग है, इसलिये मैं घर पर नहीं रूक पाऊंगा।’’ ’’लेकिन पा ’’....कुछ कहने का प्रयास करते रिंकू की बात काटते पापा बोले थे- ’’मैंने फोन कर दिया है। डॉक्टर अंकल तुम्हें दवा दे जायेंगे। घर के दोनों नौकर तुम्हारी सेवा में पहले से ही तैनात हैं न।’’ यह कहकर पापा चले गये तो कम्बल में ...
रेडियो की बात निराली
आलेख

रेडियो की बात निराली

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** गीत की कल्पना, राग, संगीत के साथ गायन की मधुरता कानो में मिश्री घोलती साथ ही साथ मन को प्रभावित भी करती है। गीतों का इतिहास भी काफी पुराना है। रागों के जरिए दीप का जलना, मेघ का बरसना आदि किवदंतियां प्रचलित रही है, वही गीतों की राग, संगीत जरिए घराने भी बने है। गीतों का चलन तो आज भी बरक़रार है जिसके बिना फिल्में अधूरी सी लगती है। टीवी, सीडी, मोबाइल आइपॉड आदि अधूरे ही है। पहले गावं की चौपाल पर कंधे पर रेडियो टांगे लोग घूमते थे। घरों में महत्वपूर्ण स्थान का दर्जा प्राप्त था। कुछ घरों में टेबल पर या घर के आलीए में कपड़ा बिछाकर उस पर रेडियों फिर रेडियों के ऊपर भी कपड़ा ढकते थे जिस पर कशीदाकारी भी रहती थी। बिनाका-सिबाका गीत माला के श्रोता लोग दीवाने थे। रेडियों पर फरमाइश गीतों की दीवानगी होती जिससे कई प्रेमी-प्रेमिकाओं के प्रेम के तार आपस...
मुझे तो राधा ही रहने दो
कविता

मुझे तो राधा ही रहने दो

कीर्ति सिंह गौड़ इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** क्या करूँगी मैं तुम्हारी रुक्मणी बनके मुझे तो बस राधा ही रहने दो। परमानंद है प्रेम की सम्पूर्णता में मुझे तो अंग तुम्हारा आधा ही रहने दो। जीवन का सच सिर्फ़ इतना सा है कान्हा इस जग में प्रेम के अलावा सब कुछ है, नहीं है दुःख मुझे आठों पहर संग रहने का इन संग के पहरों को भी तुम आधा ही रहने दो। समय कहाँ होगा रुक्मणी को, तुम्हारी बांसुरी को अपने अधरों पे धरने का। तुम्हारे कांधे पर झुका हुआ मेरा शीश और तुम्हारी बांसुरी को मेरे अधरों पर ही रहने दो। कान्हा, कभी बैठे हो कदम की छाया में रुक्मणी के संग उस कदम की छाया के नीचे संग हम दोनों का ही रहने दो। व्यस्त कर रखा है रुक्मणी को तुमने अपने घर संसार में, पहरों बैठकर जमना के तीर प्रतीक्षा का वो अधिकार भी मेरा ही रहने दो। “मुझे तो बस राधा ही रहने दो” “ओ‘कान्हा’म...
अपनों से प्रेम
कविता

अपनों से प्रेम

जयप्रकाश शर्मा जोधपुर (राजस्थान) ******************** अपनों से प्रेम कागज पर लिख देना प्रेम नहीं होता प्रेम ना लिखकर प्रेम का आभास कराकर प्रेम होता है जलती चिता में तो हर कोई लकड़ी देता है पर जीवित रहते अपनों से प्रेम करना यही प्रेम है प्रेम की अनुभूति ओर प्रेम का आभास यही प्रेम की भावना और प्रेम है परिचय :- जयप्रकाश शर्मा निवासी : जोधपुर (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु ...
जीवन का सच
कविता

जीवन का सच

कु. आरती सिरसाट बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) ******************** इश्क़ की राह में हर एक इंसान बदनाम हैं...! कुछ खत लिखें तो कुछ अभी भी बेनाम हैं..!! खुशियों को तलाश रही, जिन्दगी गमों की बहार हैं...! हारना और जीतना यहीं तो जीवन का सार हैं..!! जिम्मेदारियों ने उस नन्ही सी मासूमियत को घेरा है...! एक गलती से टूट गया वो संबंध, उसनें कहा ये तेरा है ये मेरा हैं..! किसी की यादों में ये आँखें भी बरसती हैं...! प्यास लगने पर ये धरती भी बारिश के लिए तरसती हैं..!! दुनिया कहें समय को यहीं सबसे बड़ा काल हैं...! कहती है कुछ रातें अंधेरों से, इंसान ही इंसान के लिए बना रहा जाल हैं..!! परिचय :- कु. आरती सुधाकर सिरसाट निवासी : ग्राम गुलई, बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविता...
सैंया
कविता

सैंया

मधु अरोड़ा शाहदरा (दिल्ली) ******************** प्लेन में बिठा दे सैंया, लंदन पेरिस न्यूयॉर्क घुमा दे सैंया। डाल गल बहियां, घूमेंगे हम सैंया, कभी झुमका, कभी मुंदरी, नेकलेस से अब बात बने ना। हवाई जहाज में सैर करा दे सैंया। वादा तो तू करता है, ओ मेरे सपनों की रानी। मेरा घर चलाने वाली, बच्चों की ओ मैया प्यारी। घुमा दूं! तुझे इस साल नहीं ? मैं अगले साल दुनिया सारी, लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क, सभी की सैर करा दूंगा। अभी तो तू दिल्ली घूम ले रानी, काम चला ले इससे महारानी। दिला दूं तुझको, ब्रासलेट, कंगना, टीका, बिंदी, पायल, झुमका प्लेन में भी बिठा दूंगा वादा रहा इस साल नहीं तो अगले साल ओ मेरी राम प्यारी।। परिचय :- मधु अरोड़ा पति : स्वर्गीय पंकज अरोड़ा निवासी : शाहदरा (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक ह...