नायाब दिसम्बर
भीमराव झरबड़े 'जीवन'
बैतूल मध्य प्रदेश
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नायाब जिन्दगी का, सुर ताल है दिसम्बर।
इसको न मौन कहना, वाचाल है दिसम्बर।।१
भाने लगी रजाई, मन प्रीत सज रही है।
रंगीन टोप स्वेटर, नव शाल है दिसम्बर।।२
है वक्त नापने का, अपना प्रतीक सुन्दर।
अब साल पूर्ण होगा, ये काल है दिसम्बर।।३
प्रतिघात शीत का अब, होने लगा हृदय पर।
बेडौल से बदन को, जंजाल है दिसम्बर।।४
काजू खजूर पिस्ता, बादाम नारियल घी।
पकवान खूब खाओ, प्रतिपाल है दिसम्बर।।५
अब जन्मदिन सभी का, होगा नया नवेला।
जो साल को बदलता, वो चाल है दिसम्बर।।६
जीवन बढ़ो निरंतर, संकेत मिल रहा है।
भरपेट दाल रोटी, का थाल है दिसम्बर।।७
परिचय :- भीमराव झरबड़े 'जीवन'
निवासी- बैतूल मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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