अस्तित्व
रश्मि श्रीवास्तव “सुकून”
पदमनाभपुर दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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बरसात की अंधेरी रातों में
जब भी गूंजती खामोशियो को
पानी की बूँदें तोडती है
ऐसा लगता है जैसे
रोशनी में शायद पानी
अपना अस्तित्व खो देता
डरती हूँ मैं भी
खो न जाए कही अस्तित्व मेरा
आधुनिकता के उस रोशनी में
तोड़ न दे मेरी खामोशी को
पाश्चात्य देशो का ये शोर
और एक दिन मै भी अपने
अस्तित्व को पाने के लिए
रोशनी और शोर शराबे से दूर शांत
एकांत अँधेरी रातों को तलाशते फिरूँ
परिचय : रश्मि श्रीवास्तव “सुकून”
निवासी : मुक्तनगर, पदमनाभपुर दुर्ग (छत्तीसगढ़)
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करती हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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