चुप न बैठो
मनीषा व्यास
इंदौर म.प्र.
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सृष्टि की रचनाधार
चुप न बैठो खामोश न बैठो।
कलयुग कुंडली मार कर बैठा है,
तुम्हें ही क्रांति की तलवार उठाना है ।
चुप न बैठो....
वर्तमान समाज बहरा है
इंसानियत गूंगी है
अनमोल अश्रु व्यर्थ न गंवाओ,
आवाज उठाओ
आवाज़ उठाओ,
चुप न बैठो....
इस राक्षसी दरबार में तुम
किससे आस लगाओगी,
चंडी बन बलात्कारियों की मुंड मालाएं
तुम ही तो शिव को चढ़ाओगी,
आवाज उठाओ आवाज उठाओ
चुप न बैठो....
मानवता को लुटने से बचाओ,
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ,
रण चंडी सी खुद बन जाओ,
काली सा विराट स्वरूप दिखाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज उठाओ,
चुप न बैठो....
परिचय :- मनीषा व्यास (लेखिका संघ)
शिक्षा :- एम. फ़िल. (हिन्दी), एम. ए. (हिंदी), विशारद (कंठ संगीत)
रुचि :- कविता, लेख, लघुकथा लेखन, पंजाबी पत्रिका सृजन का अनुवाद, रस-रहस्य, बिम्ब (शोध पत्र), मालवा के लघु कथाकारो पर शोध कार्य, कविता, ऐंकर, ल...
























