इश्क़ की पाकीज़गी
मधु टाक
इंदौर मध्य प्रदेश
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बिछड़ कर वो मुझे अभी भूले नही होंगे
खतों को भी मेरे यूँ हीं जलाये नहीं होंगे
इश्क़ की पाकीज़गी को न समझा कोई
हीर रांझा के फिर अब किस्से नहीं होंगे
ताउम्र गुजार दी है सितारों को गिनकर
रात भर वो मेरी तरह जागते नहीं होंगे
तस्सवुर से तेरे मुक्कदर की चादर बुनी
गर्दिश में मेरे कभी यूँ सितारे नहीं होंगे
दुआ रब से तुझे अब मंजिल मिल जाये
तेरे कदमों के तले कभी छाले नहीं होंगे
मिटा दे दिलों में जो रंजिशे मजहब की
फिर कोई भी जमाने में पराये नहीं होंगे
भंवरों सा तेरा हर फूल पर मचलना कैसा
मोहब्बत के कभी सलीके सीखे नहीं होंगे
शक के दायरे में इश्क़ पनप नही सकता
बोई है नागफनी गुल वहाँ महके नहीं होंगे
मुस्कुराहट वो जादू है जो दिलों को है जोड़ती
सूखे दरख़्तों पे तो परिन्दे भी टिकते नहीं होंगे
नदिया के सीने पर जो लहरों की है खामोशी
अपने ही हिस्से के ...

























