हाँ ! डर लगता है, पर तुम्हारें जैसा नहीं…..
मनकेश्वर महाराज "भट्ट"
मधेपुरा (बिहार)
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मैं कहूँ ऐसे की तुम्हें
कहीं डर सा ना लगे
दे देतें हो भारत माँ
को गाली फिर
तुम्हें बोलने से डर लगे
अपनी बातों के लिए
हर किसी को घसीटते सरे आम
फिर कहो ये कैसा डर लगे
डर कैसा होता ये कभी
उस नन्ही निडर से पूछों
जो जानती है पल भर में नोंच
खाएंगे दरिंदे उन्हें
जो हर पाँव सहम कर रखती
जो भड़ी सड़कों पर भी
घरवालों को साथ लेकर चलती है
हैवानों दरिंदो के डर से
फिर तुम कहो ये
डर क्यों नहीं दिखता तुम्हें
तुम अपने ही बातों में क्यों
नहीं दिखाते इस डर को
हमें भी डर लगता है
पर तुम्हारे जैसा नहीं
कब नोंच खाएँ दरिंदे
बेटी, बहन, माँ को
हाँ ! डर लगता है, पर तुम्हारें जैसा
नहीं.....
परिचय :- मनकेश्वर महाराज "भट्ट" साहित्यकार , शिक्षक मधेपुरा , बिहार
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