खुला बोरबेल
शत्रुहन सिंह कंवर
चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
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(छत्तीसगढ़ी)
पिये बर पानी खोदे हन गढ़्ढा
पानी तो नई मिलीच छोड़ देहेन गढ्डा
काबर भूलगें बंद करे ला वो गढ्डा
कतको जीव ह मर जाथे गिरके ओ गढ्डा म
काबर तै नई जानेच रे मानुष
ना समझें काकरो दुःख दर्द ला
जीहा हे साँप,मेचका आऊं राहुल कस
सिरदर्द बंगे कतको माई बाप बर
कतको के होगे घर द्वार सुना
छोड़ो ना कभी ऐसन गढ्डा
काकरो जीवन हा तमाशा बन जाथे
फस के ये गढ्डा म
बुलाए ला पड़ जाथे सेना रक्षक ल
जेहा बन जाथे मीडिया बर ताजा खबर
पढ़ले सुनले देखले वहीच खबर
नेता मन राजनीतिक खेलत हे
बैठ के घर म मोबाइल ले बोलत हे
करत हे आम इंसान बचाए ला कोशिश
नेता मन वाह वाही कमावत हे
करेला पढ़ते प्रार्थना प्रभु ले जीवन बर
सुनथे दर्द प्रभु हर जीवन के खातिर।
परिचय :- शत्रुहन सिंह कंवर
निवासी : चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
घोषणा पत्र : ...









