मिलने से होती है
संजय जैन
मुंबई (महाराष्ट्र)
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न हम उनको समझ सके
न वो हमको समझ पाये।
पर हम फिर भी निरंतर
आपस में मिलते जुलते रहे।
और एक दूसरे से अपने
दुख दर्द बाटते रहे।
इसलिए लोगों ने इसे
अलग ही रंग दे दिया।।
हमारी इस मित्रता का उन्होंने
अलग ही नाम दे दिया।
करे तो क्या करे हम अब
इस हवा को रोकने के लिए।
जो दिखता है जमाने को
वो सच भी नहीं होता।
और हालातों के शिकार
बहुत लोग हो जाते।।
माना की मोहब्बत का
रंग चढ़ते देर नहीं लगती।
निगाहों से निगाहों का
मिलन भी जल्दी होता है।
दिलो की चाहत भी
जल्दी बढ़ने लगती है।
और मोहब्बत का भूत
दिल पर छा जाता है।।
समय के साथ साथ फिर
सब कुछ बदलने लगता है।
समझने और जानने की
समझ भी फिर आ जाती है।
दिलो में फिर प्यार का
रंग ही रंग दिखता है।
और मिलने जुलने से ही
मोहब्बत का उदय होता है।।
परिचय :- बीना (मध्यप्र...





















