सवाल का उत्तर
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
********************
पापा मुझे भी तो बताओ
तनिक सोच समझकर समझाओ
क्या मैं जन्म से ही पराई हूँ?
आपकी बेटी हूँ, माँ की जाई हूँ
भैया की बहन भी हूँ
दादा-दादी की आँँखों का तारा हूँ।
मेरे जन्म पर तो आप बहुत खुश थे
खूब उछल रहे थे,
पाला पोसा बड़ा किया,
कभी आंख में आँँसू न आने दिया
हर ख्वाहिश को मान दिया।
अब में बड़ी हो गई हूँ
दादी कहती है ब्याहने
योग्य हो गयी हूँ
क्या इसीलिए अभी से
पराई हो गयी हूँ।
भैया भी तो भाभी को
ब्याहकर लाये हैं,
भाभी दूसरे घर से आई है,
फिर भी घर वाली हो गई
यह कैसा रिवाज है समाज का
जहाँ जन्मी, खेली कूदी बड़ी हुई
उसी आँगन में पराई हो रही हूँ।
माना कि भैया ब्याहकर
कही गया नहीं
बस इतने भर से
कौन सा पहाड़
आखिर फट गया।
भैय्या जैसा मेरा भी तो
आप सबसे रिश्ता है,
मेरा हक भैय्या से क्यूँ कम ...






















