बेटी तो वरदान है
किरण पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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बेटी तो वरदान है
नही हे अभिश्राप,
दोनों कुल को तारती बेटी
तो हे महान,
बेटी लक्ष्मी बेटी दुर्गा
सीता सयानी राधा सी प्यारी,
मीरा कर्मा द्रोपति उत्तरा
और अहिल्या शबरी अनुसूया,
कोई रक्षा भारत की करती,
कोई पिता का मान बढ़ाती,
कोई प्यार को हे तज देती,
कोई खिचड़ा भात खिलाती,
कोई कृष्ण को है पुकारे,
कोई गर्भ के प्राण बचावे,
कोई पत्थर की नारी बनती,
कोई झूठे हे बेर खिलाती,
कोई बचपन सा लड़ाती,
कोई देश की रक्षा करती,
कोई न्याय का पाठ पढ़ाती,
कोई ब्रह्म को धरती पर लाती,
पुत्र रूप में गोद खिलाती,
हर शास्त्र बेटी की वंदना,
सरस्वती मीणा की वंदना,
बेटी के कितने एहसान,
धरती पर परब्रह्म का निवास,
हर क्षेत्र में परचम भारी,
कलम शस्त्र से लिखती हे भारी,
धरती से आकाश उसी का,
नहीं करो अपमान उसी का,
नहीं कोख मे...






















