मुझको न्याय दिलवाओ तुम
रामेश्वर दास भांन
करनाल (हरियाणा)
********************
पग-पग भरे पड़े हैं दरिंदे,
उन दरिंदों से कैसे लाज बचाऊंँ मैं,
मैं गरीब दलित की बेटी हूंँ,
उन दरिंदों से कैसे जान बचाऊंँ मैं,
हर पल ठगा है जिन्होंने ने मुझको,
खिलवाड़ किया मेरी लाज से,
वहशी दरिंदों ने मारा है मुझको,
उन दरिंदों को कैसे सजा दिलाऊंँ मैं,
जो समझते ना है उनकी बेटियों जैसी मुझको,
उन दरिंदों को कैसे समझाऊंँ मैं
पेड़ पर लटका दिया लाश को मेरी,
उन दरिंदों को कैसे अपनी तड़प बताऊंँ मैं,
धर्म के ठेकेदार भी मेरी मौत पर,
अब विरोध नहीं करते,
उनको मेरी पीड़ा का,
कैसे अहसास दिलाऊंँ मैं,
मन की बातें करने वाले को,
कैसे अपने मन की बात सुनाऊंँ मैं,
मैं गरीब दलित की बेटी हूंँ,
कैसे जान बचाऊंँ मैं,
ए सत्ता के राजाओं ,
मुझको न्याय दिलवाओ तुम,
उन वहशी दरिंदों को,
चौराहों पर लटकाओ तुम,
कर दो उनका एनकाऊंटर,...





















