जय हनुमान
सरला मेहता
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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शुभ दिवस चैत्र पूर्णमासा,
जन्म लियो है कृपा निधाना
पिता केसरी अति प्रसन्ना
जागे भाग अंजनी माता
ठुमक-ठुमक पैंजनियाँ बाजे
सर्व जगत को अति मन भावे
लाँघे जंगल, पर्वत नापे
मारुतिनंदन रवि ही निगले
सीताहरण सुने हनुमाना
लिए मुद्रिका आए लँका
देखि दूत हर्षित है माता
मीठे फल दीनी सौगाता
अजब गजब ये वानर आया
तहस नहस भई स्वर्णलंका
महा कहर चहुँ ओर बरपा
खंडहर भए महल चौबारा
लखन ह्रदय तीर जब लागा
अमृत जड़ ले आए वीरा
दशानन का हुआ संहारा
विभीषण हुए लंका राजा
रामकथा वाचन नित होवे
रघुनाथ नाम की जोत जले
मन वचन कर्म से शुभ सोचे
सर्व काज त्याग हनु विराजे
परिचय : सरला मेहता
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहा...





















