उड़ान
राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
********************
सुन मेरे मन के परिंदे
आगे ही तू बढ़ता चल।
न सोच तू इन राहों का
बस आगे ही निकलता चल।
न सोच तू राहगीरों का
वो भी खुद पंथ पे मिल जाएंगे।
न सोच तू इन हवाओं का
ये भी एक दिन बह जाएंगी।
न सोच तू इन तूफानों का
ये भी एक दिन थम जाएंगे।
न सोच तू इस अंनत व्योम को
इसको भी एक दिन तुम छू जाओगे।
न डर तू अनजान राहों से
ये भी एक दिन परिचित हो जाएंगे।
सुन मेरे मन के परिंदे
बस तू आगे बढ़ता चल
अपनी उड़ान यूँ ही तू भरता चल।
परिचय :- राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय ...

























