नया काम नई शान
विजय गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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नए काम में नई शान से,
सभी उत्साह जगाते हैं
अक्ल मेहनत साथ इंडिया,
अच्छी दुकान चलाते हैं
पर शब्दों की जादूगरी से,
यश सम्मान भी पाते हैं
कहीं तकदीर वश घूरे से,
सोना भी उपजाते हैं
हंसते खेलते जो दिखते,
गलियों में चौराहों में,
अंतर्मन उनका घिरा रहे,
निहित अवसाद आहों में,
सेवा सृजन ऊर्जा उमंग,
अंतर्मन की चाहों में,
हंसते हुए ही जो मिलते,
अति व्यस्त ही पाते हैं
पर शब्दों की जादूगरी से,
यश सम्मान भी पाते हैं
कहीं तकदीर वश घूरे से,
सोना भी उपजाते हैं
रोजी दिहाड़ी मांगते वो,
सारे मजदूर परखिए
अक्सर काम लगाना चाहो,
रंग ढंग आप देखिए
गुजरबसर के साधन सारे,
ताकत में आय समझिए
छोटी बड़ी अपनी जरूरत,
सब पूरी कर जाते हैं
पर शब्दों की जादूगरी से,
यश सम्मान भी पाते हैं
कहीं तकदीर वश घूरे से,
सोना भी उपजाते ह...























