हमर गांव सुघ्घर गांव
खुमान सिंह भाट
रमतरा, बालोद, (छत्तीसगढ़)
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जिसकी गोद में मेरा बीता है बचपन,
जिसकी सेवा के लिए अर्पण है मेरा तन-मन-धन।
जिसके नीर का हर एक बूंद अमृत
और अन्न का हर एक कण छप्पन भोग है
मेरे लिए वही मेरा बैकुंठ और वही देवलोक है।
जिसका हर एक चौंक मेरा चार धाम है,
मुझे गर्व है कि मेरा जन्म भूमि
पावन रमतरा ग्राम है
स्वच्छ , सुगंधीत व ताजी हवा गांव की ओर अनायास ही खींच लाती है। ग्राम वासियों का आपसी प्रेम और भाईचारा की भावना की तो बात ही निराली है। जिस प्रकार फूल बगीचे की शोभा पहले है और डालियों की शोभा बाद में है ठीक उसी प्रकार यहां के निवासी जाति, धर्म और ऊंच- नीच की नहीं बल्कि इंसानियत की शोभा पहले है।
तीन सौ परिवारों के १६५० लोगों को अपनी गोद में आश्रय दिया हुआ हमारा गांव यहां आजीविका का मुख्य साधन कृषि है, और कुल जनसंख्या के आधे से अधिक लोग कृषि कार्य पर निर्...


















