बेटी अउ बेटा एके बरोबर
अशोक पटेल "आशु"
धमतरी (छत्तीसगढ़)
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बेटी अउ बेटा एके बरोबर
दुन्नो होथे घर के धरोहरर।
बेटी अंगना के फुलवारी
त बेटा आय घर के माली।
बेटी सुख-दुख के सँगवारी
त बेटा से होथे पूछ-पुछरी।
बेटी दु कुल के लाज होथे
त बेटा से कुल के मान होथे।
बेटी हमर पहिचान होथे
त बेटा से एकर धियान होथे।
बेटी करम के पूजा होथे
त बेटा धरम के धजा होथे।
बेटी सृष्टि के आधार होथे
त बेटा ओकर रखवार होथे।
बेटी ह सरग के द्वार होथे
त बेटा घर के जिम्मेदार होथ।
परिचय :- अशोक पटेल "आशु"
निवासी : मेघा-धमतरी (छत्तीसगढ़)
सम्प्रति : हिंदी- व्याख्याता
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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