कौन हूँ मैं….?
गोपाल मोहन मिश्र
लहेरियासराय, दरभंगा (बिहार)
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कौन हूँ मैं.....ऐ जिंदगी तू ही बता,
थक गया हूँ मैं खुद को ढूँढते-ढूँढते I
अब कोई ख्वाहिश नहीं पालता मन में,
विरक्ति हो गई है नित एक ही ख्वाब बुनते-बुनते I
सुनता हूँ जीवन में फूल भी हैं, काँटे भी हैं,
मेरा जीवन बीत गया काँटे ही चुनते-चुनते I
तानों कलंकों के बीच, जिंदगी से हारा नहीं हूँ मैं,
लोगों की चुभती बातों से, धैर्य टूट जाता सहते-सहते I
किसी से शिकायत नहीं अपनी व्यथा पर,
मुझे चले जाना है दुनिया से यूँही चलते-चलते I
ऊपरवाला भी व्यथित होगा मेरी नियति पर,
रो रहा होगा, मेरी करुण-वेदना सुनते-सुनते I
परिचय :- गोपाल मोहन मिश्र
निवासी : लहेरियासराय, दरभंगा (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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