जले हैं दीप खूब झिलमिलाने दो
आलोक रंजन त्रिपाठी "इंदौरवी"
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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जले हैं दीप इन्हें खूब झिलमिलाने दो
ख़ुशी को पास में आकरके गीत गाने दो
चमन को आज विरासत में जो मिली खुश्बू
उसे दिलों में हर मकाम पे लुटाने दो
ग़रीब और अमीरी में फ़र्क छोड़ो जी
सभी से हाथ मुस्कुराके अब मिलाने दो
ये जिंदगी तो तीन दिन का बुलबुला ही है
इसे बेख़ौफ़ होके और खिलखिलाने दो
न रोककर उसे मायूस करो अब रंजन
उसे भी अपना क़दम एक तो बढ़ाने दो
परिचय :- आलोक रंजन त्रिपाठी "इंदौरवी"
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए (हिंदी साहित्य)
लेखन : गीत, गजल, मुक्तक, कहानी, तुम मेरे गीतों में आते प्रकाशन के अधीन, तीन साझा संग्रह में रचनाएं प्रकाशित, १० से ज्यादा कहानियां पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, ५० से ज्यादा गीत के चल पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, २०१६ से लेखन में अभिरुचि
विशेष : आध्...






















