शक्ति
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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दुःख सुख के संग
वो तुम्हारा मर्म जानती
मगर कह नहीं पाती।
विचारों से करती संघर्ष
जैसे स्त्री ससुराल की
उत्पीड़न की बात
नहीं बताती
बाबुल को।
झूठी हंसी लिए
खुश रहती
उत्पीड़न का दर्द
किस्से छिपाए।
उत्पीड़न में
मिलते सिर्फ
वेदना के स्वर
जो बाटें जाते
एक कहानी के तरह।
उत्पीड़न की पीड़ा को
नए जमाने में
ना छिपाओ।
बताओं दुनिया को
क्योकिं स्त्री सशक्तिकरण की
शक्ति
तुम्हारे
अब जो साथ है।
परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अ...




















