दो शब्द
राजीव रावत
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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जिंदगी और मोहब्बत की
ऊंचाइयों में
एक बहुत ही अजीब अंतर होता है--
एक का पैमाना
छूना आकाश के तारों को
और दूसरे का समुन्दर होता है-
जब
जिंदगी में सीढ़ियों को चढ़ते हुए
चांद तारों को तोड़ लाते हैं,
सफलता के झंडे
जब हमारे चारों ओर फहराते हैं-
यही पैमाना ही
जिंदगी की तब ऊंचाइयों का नाप होता है--
और
मोहब्बत में
जितना डूबो देते हैं अपने आप को
उतना ही उसके इश्क की
बुलंदियों का माप होता है--
मोहब्बत
शरीर से हो या नश्वर से
कोई अंतर नहीं होता है--
बस डूब कर
उबरना ही इसका मंतर होता है-
जितना डूब जायेंगे
और थाह ले लेगें गहराईयों की-
उतनी सीढ़ियों
अपने आप चढ़ जायेगें आस्था
और मोहब्बत की ऊंचाइयों की-
माना की मोहब्बत की राह
कटंको और रूकावटों और बंधनों से
भरी दुरूह होती है-
लेकिन मात्र तन की अभिलाषा
प्यार-इश्क-मोह...
























