पिंजरा
सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)
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प्यार का सोने का पिंजरा,
पिंजरा तो एक पिंजरा है,
वो हो बेशक सोने का,
उसमें रहते हम और तुम,
खाते पीते मस्ती करते,
जीवन का सुख हर पल पाते,
पर पिंजरा तो एक पिंजरा है,
वो हो बेशक सोने का!
संगीत है जो जीवन में,
तुम में गुण है कमाने का,
हम में प्यार लुटाने का,
दोनों की चाहत बढ़ाने का,
पर पिंजरा तो एक पिंजरा है,
वो हो बेशक सोने का,
खुले आसमान में उड़ना है,
चांद तारों से बात करना है,
कदम से कदम मिलाना है,
तेरा हमसफर बन जीना है,
पर पिंजरे में नहीं रहना है,
तुझे पसंद हो ना हो,
अब तो बाहर आना है,
पिंजरा तो एक पिंजरा है,
वह हो बेशक सोने का!!
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परिचय :- सुरेखा "सुनील "दत्त शर्मा
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहान...





















