डर ज़रा
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर म.प्र.
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झांक मन में आज अपना आकलन तू कर ज़रा!
ए मनुज सब जानता है ईश उससे डर ज़रा!
मन में तेरे है मलिनता!
स्वार्थ की इसमें बहुलता!
क्यों नहीं सच्ची सरलता?
पालता हैं क्यों जटिलता?
स्वच्छ कर सद्भावना से स्वयं का अन्तर ज़रा!
ए मनुज सब जानता है ईश उससे डर ज़रा!
'अहं' में रहता मगन तू!
सतत करता है पतन तू!
बोलता कड़वे कथन तू!
क्यों नहीं करता मनन तू?
अपने शब्दों में शहद की मधुरता को भर ज़रा!
ए मनुज सब जानता है ईश उससे डर ज़रा!
पाप हैं अविराम तेरे!
व्यस्त हैं दिन-याम तेरे!
अनैतिक सब काम तेरे!
दुष्टता है नाम तेरे!
सोच क्या ले जाएगा संग अपने यायावर ज़रा!
ए मनुज सब जानता है ईश उससे डर ज़रा!
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परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१
जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस...























