मां कालरात्रि
किरण पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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माता तेरा रूप निराला,
कहीं शांत कहीं आग की ज्वाला।
कहीं अंबे कहीं काली माता,
कही खड़ग कही खप्पर ज्वाला।
सौम्य रूप तुझमें हम पाते,
महिषासुर मर्दिनी है तु काली।
शिव के ऊँपर चढ़कर तू भागी,
चंडी रूप ले रक्तबीज संहारे।
नर मुंड की माला धारे,
असंख्य रूप में शुंभ निशुंभ संहारे।
हाथों में तलवार खड्ग मां,
विद्युत की है गले में माला।
चक्र त्रिशूल वज्र तुम्ह धारे,
चंडी रूप से शिव भी भागे।
भक्तो की हे मां यही पुकार,
कलयुग में मां तुम्ही पधारे,
असंख्य राक्षस आतताई माता।
कन्या का अति शोषण करते,
कन्या असुरक्षित है यहां माता।
आज खड़क ले आओ मां,
निशाचरो को मिटाओ मां।
दुष्टों का वध कर जाओ मां।
परिचय : किरण पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन...



















