मंथन
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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सागर अंबर, अंबर सागर
सागर में अंबर प्रतिबिंबित
कहीं कुछ जाना नहीं
शून्य सा रीता अंबर
सागर में उत्साह अथाह।।
अंबर के गहरे में मंथन
मंथन को मन का संबंल
संबंल पाने दौड़े तन मन।
मन चंचल है पर दीवारें
अथाह अंबर है शून्य हर पल
गेहूं कहां खोजे पग तल।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं व वर्तमान में इंदौर लेखिका संघ से जुड़ी हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्व...






















