Friday, September 4राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

कविता

तिरंगे की महिमा
कविता

तिरंगे की महिमा

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** भारत की पहचान तिरंगा, त्याग और बलिदान तिरंगा, समृद्धि और प्रकृति है तिरंगा, हिंदुस्तानियों का मान और सम्मान तिरंगा। इस तिरंगे के खातिर कितने युद्ध किये सैना ने गुलामी की जंजीरों से मुक्त तिरंगा, बलिदानियों का मान तिरंगा शहीदों का सम्मान तिरंगा आन बान और शान तिरंगा गर्व और स्वाभिमान तिरंगा जान और जहान तिरंगा शक्ति और साहस से तिरंगा, कुछ कर गुजरने की प्रेरणा है तिरंगा। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहि...
ओढ़ ली खामोशी मैंने
कविता

ओढ़ ली खामोशी मैंने

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** ओढ़ ली खामोशी मैंने, किसी हथियार के रूप में नहीं, बस अपने बचाव के लिए, महसूस हो रहे दुराव के लिए, करता रहा अब तक निर्देशित सबको, नास्तिक मन द्वारा मान चुके, अपने परिवार रूपी रब को, पर अब निर्देशन किसी को सुहाता नहीं है, मेरी मौजूदगी भी किसी को सुहाता नहीं है, चकित हूँ अचानक से आए मेहमान के लिए, जिसने एकांत का यह कमरा सजा दिया, और मेरी ही महफ़िल में मुझे पराया बना दिया, वक्त बदला तो रिश्तों के मायने बदल गए, जो कभी साए थे, वो धूप बनके ढल गए, मेरी हर सलाह अब इक दीवार सी लगती है, अपनों के बीच भी यह जिंदगी बीमार सी लगती है, शब्द थक चुके हैं अब मिन्नतें करते-करते, थक गया हूँ मैं भी अंदर ही अंदर मरते-मरते, इसलिए अब मैंने चुप रहने का हुनर सीख लिया, शिकायतों के पन्नों को भीतर ही भ...
सब्र
कविता

सब्र

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** निसंदेह सब्र के साथ सब कुछ सम्भल जाता है, किन्तु इस लंबे सफर में काफी कुछ छूट जाता है! मौन हो जाती हूँ निशब्द नहीं, आवाज भी आती है पर वाणी सुनाई नहीं देती भावनायें उबलती हैं किन्तु बहने नहीं देती शब्द भी आते हैं किन्तु लय नहीं। व्याख्या बन चुकी हूँ उस पुस्तक की जिसके पहले पन्ने पर प्रेम की परिभाषा लिखी है, अंतिम पन्ना आघात का, मध्यभाग में है जज़्बातों से खिलवाड़। भय नहीं की हार जाऊँगी, बस अब हार जीत की आस नहीं, आइना हूँ टूटती नहीं, सब्र से भरी हूँ टूट के बिखरने का डर है, किन्तु जीना छोड़ती नहीं, क्योंकि रचयिता ने रचा है जीवों का जीवन संवारने के लिए जीवन संग्राम में निमित्त बन इतिहास बनने के लिए!! परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी ...
मौसम की शरारत
कविता

मौसम की शरारत

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** मौसम ने की शरारत और बहारों ने पैगाम लिख दिया नभ से दूर चाँद आज देखो स्याह जुल्फों ने छिपा लिया पवन पालने झूले अरमान तारों को हँसना सिखा दिया बहना अल्हड़पन में झरनों को झरते नयनों ने सिखा दिया घंघरू खनक गजरे महक बहकना सुरों को सिखा दिया सतरंगी सपनों ने मन के हया में हिना का रंग मिला दिया खंजनी अखियों का जालिम वार हुश्न को कातिल बना दिया अधरों की छुअन से सरगम ने भँवरों को गाना सिखा दिया यौवन भार से झुकी देह ने शर्माना फूलों को सिखा दिया मिलना दिलों का चुपके-चुपके राज को राज रहना सिखा दिया पीहू पीहू करे प्रेम में मनवा प्रीत का उन्माद बढा दिया जमुना तट पर रास रचे फक्कड़ राधा माधव को मिला दिया दिन चढे चाहे रात ढले पल पल प्यार में बस गुजार दिया बिखरा रंग प्यार का ऐसा नफरत करना ...
पवित्र होती नदियां
कविता

पवित्र होती नदियां

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** नदियों में छोटी बड़ी नदियाँ पवित्र कहलाती ये नदियाँ आस्थाभक्ति की आत्मानदियाँ तृप्तकराती मानव को, नदियाँ।। नदियों में पवित्र, गंगा महानदी शिव की जटा से, बही गंगा नदी करते स्नान ध्यान, करते आचमन श्रद्धालु करते पूजा, मिलता शगुन।। मित्र श्रद्धालु भक्त बन्धु सह परिवार डुबकी लगाने को, सब रहते तैयार बहती गंगा की, जहाँ तेज जलधार आत्मसन्तुष्टि करातीगंगा, बून्द धार।। हर हर गंगे से गूँजता, गंगा का धाम गंगा नदी बही जहाँ, वही पुण्य धाम उमड़ता है बेसुमार, भक्तों का रैला भक्तिभावना में उमड़ता, गंगा मेला।। पिंडदान से,साही करते गंगा स्नान परम्परा में गंगा की पूजा होता ध्यान सगुन शान्ति में मिलती गंगा के धाम गंगा आरती गंगा स्तुति करते प्रणाम।। गंगा नदी बनी एक विकास का धाम गंगा एक पुण्य पवित्र मिलन स्थान भक्त पर्...
आदमी का व्यवहार
कविता

आदमी का व्यवहार

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना करनाल (हरियाणा) ******************** आदमी को समझना इतना आसान नहीं होता, चेहरा तो हर कोई पढ़ लेता है, लेकिन चेहरे के पीछे छिपे आदमी को पढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं। वह मुस्कुराता है तो जरूरी नहीं कि भीतर खुश हो, कई बार मुस्कान भी दर्द छिपाने का सबसे सुंदर तरीका होती है। वह चुप रहता है तो जरूरी नहीं कि उसके पास कहने को कुछ नहीं, कभी-कभी बहुत कुछ कह देने के बाद आदमी चुप होना सीख जाता है। रिश्ते भी अजीब हैं- जब तक आदमी काम आता है, तब तक अपना है। जिस दिन उसके हाथ खाली हो जाएँ, उसी दिन कई रिश्तों की असलियत सामने आने लगती है। कुछ लोग आपके सुख में आपसे ज्यादा खुश दिखाई देंगे, लेकिन आपके दुख में उनकी व्यस्तताएँ अचानक बढ़ जाएँगी। कुछ लोग आपके आँसू देखकर कंधा नहीं देंगे, बस इतना पूछेंगे- "हुआ क्या?" ...
पुस्तक के प्रश्न
कविता

पुस्तक के प्रश्न

सूर्यपाल नामदेव "चंचल" जयपुर (राजस्थान) ******************** पुस्तकों की गोद सूनी हो चली है कि शब्द अब गर्भधारण नहीं करते, मशीनी मस्तिष्क की फसल आ रही है कि भाव अब सृजन का कारण नहीं लगते। पुस्तकालय की अलमारियां बांझ बन रही हैं, धूल की चादर ओढ़े, कोई दिलासा से सहलाते हाथ तारण नहीं बनते। तकनीक ही खुद से कलम बन रही है, शब्दकोश से शब्द चुनकर कविता गढ़ रही है। पुस्तकें ही प्रश्नचिन्ह बन खुद खड़ी हो रही हैं कि स्याही की बूंदों में अब विचारों के भाषण नहीं सजते, फिर भी कोई कोने में बैठा कागज़ काला करता है, भूखे पेट, गीली आँख से सच को शब्दों में भरता है। क्योंकि जब तक एक भी कलम रक्त से लिखेगी, पुस्तकों की गोद फिर से हरी-भरी होगी। परिचय :- सूर्यपाल नामदेव "चंचल" शिक्षा : एम ए अर्थशास्त्र , एम बी ए ( रिटेल मैनेजमेंट) व्यवसाय : उद्यमी, प्रबंधन सलाहकार, कवि, लेखक,...
तिरंगे की शान
कविता

तिरंगे की शान

रूपेश कुमार चैनपुर (बिहार) ******************** वतन की ख़ाक में जन्नत का सिलसिला देखा, हर एक वीर के लहू में मैंने हौसला देखा। तिरंगा जब भी खुली धूप में लहराता है, हर एक दिल में नया देश का हौसला देखा। न धर्म बाँट सका, न कभी ज़ुबाँ ने बाँटा, हमारी एकता में मैंने काफ़िला देखा। क़लम भी हाथ में हो, हाथ में हुनर भी रहे, यही तो देश के उजले कल का रास्ता देखा। बेटियाँ जब भी पढ़ीं, रोशन हुआ हर इक आँगन, उन्हीं के साथ बदलता हुआ फ़लसफ़ा देखा। खिलाड़ियों ने जहाँ तिरंगा ऊँचा कर दिखाया, वहीं भारत का चमकता हुआ हौसला देखा। न भ्रष्ट सोच रहे, न किसी से द्वेष रहे, यही स्वतंत्र भारत का आईना देखा। चलो प्रण आज यही, देश सबसे पहले हो, इसी विचार में भविष्य का उजाला देखा। दुआ है "हिंद" सदा अमन का चमन महके, हर एक दिल में तिरंगे का ही उजाला देखा। परिचय ...
सावन आया रे सखी
कविता

सावन आया रे सखी

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** देख सखी सावन आया रे, सावन की झड़ी संग, बूंद-बूंद मोती सजे। देख नजारा सावन खुद, महादेव को जल चढ़ाने आया। देख सखी बरसे सावन झूमके। बदरा भी ढोल बजाता आया। आराधना के तीज त्यौहारों से, चौमासा का मौसम आया। उमड़-घुमड़ घटा गरजे, बरसे सावन। नव-श्रंगार कर सखियां मिले, मन मोतियों से झूला सजाया। अमवा की डाली पर, उमंगों का झूला लहराया। खुशियों में सबका मन समाया। झरते झरने मन को रिझाया, कोयल ने भी गीत गुन गुनाया। पेड़ों की डाली झुक झुक जाए, हरियाली की बिछी चादर, धरा भी घूंघट उड़ाये। भीगे तन-मन, देख री सखी बरसे सावन। दिल झूम-झूम जाए, सावन आया रे सखी, सावन की घटाएं। बदरा भी ढोल बजाये। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्...
आदिवासी मूलनिवासी
कविता

आदिवासी मूलनिवासी

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जल, जंगल और जमीन के असली मालिक, आपकी दुर्गति के कारण हैं खुद को सभ्य कहने वाले असभ्य, बर्बर, नोचकर संपत्ति बनाने वाले वो लोग जो आज भी लगे हैं अपनी उसी जुगत में, धर्म, संस्कृति, आविष्कार और विकास की बात करते हुए, ले आये हैं धरती को विनाश के कगार पर, एक दिन वे भी मारे जायेंगे अपनी अकड़ के साथ ही, और हां अपनी लालसा की सजा प्रकृति द्वारा दिलवाएंगे सभी जीवों को व धरतीपुत्रों को भी। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित कर...
दोस्ती कृष्ण सुदामा सी
कविता

दोस्ती कृष्ण सुदामा सी

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** दोस्ती कृष्ण सुदामा सी, नहीं गरीबी अमीरी का भान, मन मिले वही दोस्त बने, प्रेम वही है साथ। दोस्त के मन की बात को, समझ जा जाए वह दोस्त, हर हाल में साथ दे, वही दोस्त मजबूत। छोटे को ऊपर उठाएं, करे बराबर का साथ, नहीं राग नहीं द्वेष जहां, वही दोस्ती का हाथ। गरीबी अमीरी की खाई को, नहीं धोखा नहीं छल, कृष्ण सुदामा सा निश्छल प्रेम, वही दोस्ती का है मेल। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०...
डाली गुड़िया
कविता

डाली गुड़िया

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** फूलों सी कोमल, नाजुक परी। हमारे घर आंगन में उतर आई है। आंखों में ढेर सारा प्यार, और होंठों पर मुस्कान लाई है। गुड़िया से खेलने को, वह गुड़िया संग लाई है। हल्के नीले रंग को लपेट कर, मानो नील गगन ने सजाया है। काली घटाओं से सुंदर केशों से, अभी-अभी शीतल वर्षा होगी। धरती पर प्रेम का बीजारोपण कर, प्यार सिखाने आई है। एक नन्ही परी हमारे आंगन में आई है। गुड़िया रानी फुलों को लेकर, सबको समझाने आई है ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, छल, कपटको पास मत आने दो। प्रेम से सभी का हृदय परिवर्तन करना सीखों। उसे‌ गोद में उठा लो, और संसार को प्रेम का संदेश बांटो। यही तो वह सभी को बताने आई है। एक प्यारी सी मीठी सी गुदगुदी हंसी से संदेश, सुनाने आई है। एक नन्ही सी परी हमारे आंगन में उतर आई है परिचय : आशा शर्मा पत...
म्हारी धार
कविता

म्हारी धार

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** (निमाड़ी कविता) म्हारो साढे बारा तलाव नो धार बून्द-बून्द पाणी का लेण तरसें हे अन, छोरा पर, पाणी भरवा लेण बापू बरसे हे। कइ वताउ तमे इनी धार की वात अन छोरी को बाप, धार म छोरी देण्या माटे बिचके हे। माऴवो, धार म नी दू निमाड की छोरी पाणी, भरी, भरी न, थाकी जावेगी म्हारी बेटी। अब तो, दायजा म, पाणी को बम्बो च मांगेगा दायजो नी दियों तो फेरा से, उठ इ न छोरा क, ल इ भागेगा। यो धार म्हारो, पाणी का लेण तरसी गयो पाणी का लेण राध्यो, मग्या पर बरसी रयो। हे इन्दर भगवान तम अगऴा, बरस घणा वरस जो अन म्हारा धार का साढे बारा तलाव ना आखा भरजो म्हारी याज आस छे ईश्वर आस पूरी करजो। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखत...
सावन
कविता

सावन

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** सावन हुलसी बादली, बरस रही घनघोर। कोयल कजरी गा रही, नाच रहे वन मोर। हरी चुनरिया ओढ़कर, धरा करी श्रृंगार। मेघ मल्लिका रूपसी, सजती सौ सौ बार। सावन के झूले पड़े, साजन आओ साथ। रिमझिम पड़ी फुहार में, मेहँदी महकी हाथ। काली घटा गगन चढ़ी, निर्मल बरसे नीर। हुआ सुगंधित मलयगिरि, शीतल मंद समीर। साजन सावन बीतता, हृदय कटारी शूल। मदन तरु की शाख पर, लगता यौवन धूल। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशि...
पराधीनता से स्वाधीनता
कविता

पराधीनता से स्वाधीनता

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** पराधीनता से स्वाधीनता का देशहित का अजूबा सफरनामा, बेहिचक, बेधड़क निःसंकोच भारत की साहसिक सन्तानो ने देशरक्षा का पहना, कवचजामा देश का हर नागरिक हर जवान सँघर्ष में बढ़ा आगे सीना तान दिखाया अपनी आन-बान-शान परवाह किये नहीं, दिए जान विरोध में एकजुटता बने समान देश के हर कोने-कोने से, हर वर्ग देश रक्षा में बरसे, किये सँघर्ष साहसिकता लहराए, था हर्ष असहयोग आंदोलन का रहा गर्व स्वाधीनता आंदोलन लम्बे वर्ष सँघर्ष जारी रहा, विरोध अविराम देशप्रेम में निष्ठा त्याग, एक काम फांसी खाये, कारागार में रह आये सीने से सिर में गोली, खून ही होली लड़ेंगे मरेंगे, हम हिम्मत नहीं हारेंगे, अटल रही, देशप्रेमियों की बोली पराधीनता से स्वाधीनता की टोली लगाए नारा, छोड़ो अब देश हमारा देशहित देशसेवा और देशप्रेम का लहरायेंगे देश का, त...
घूटन
कविता

घूटन

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** करूंगा शिकायत रब के दर पर जिन्होंने मुझे रुलाया है। मुस्कुरा कर औरों के संग मेरी आंखों में आंसू लाए है। थक चुका हूं हर रिश्ते को निभा कर अब जाकर अपने रब के घर उसको अपना हर गम सुनाऊंगा। दुआएं जिनको रास न आई मेरी देकर बददुआएं उनको अपनी बिरहा की कहानी सब को सुनाऊंगा। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में...
स्व. उमाशंकर सिंह जी की स्मृति में
कविता

स्व. उमाशंकर सिंह जी की स्मृति में

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** कहाँ गया वो मुस्कुराता कारवाँ, कौन बताएगा, हर गली अब आपका किस्सा ही बस दोहराएगा। रसड़ा की राहें पूछती हैं, लौटकर कब आएँगे, सूना-सूना हर चमन अब अश्क ही बरसाएगा। जनसेवा की लौ जलाकर जो स्वयं सूरज बना, उसके जाने का अँधेरा उम्र भर तड़पाएगा। सिर्फ़ नेता ही नहीं थे, एक सहारा थे सभी का, नाम उनका हर धड़कन में सदा गूँजता जाएगा। वक्त ने कैसी लिखी तक़दीर, दिल यह मानता नहीं, इतना जल्दी छोड़ जाना हर किसी को रुलाएगा। बलिया की इस पावन मिट्टी का था वह गौरव महान, उनका हर संघर्ष इतिहासों में अमर हो जाएगा। बसपा का वह एक दीपक, आँधियों में भी जला, अब वही दीपक फ़लक पर बन सितारा छा जाएगा। "आनंद" की आँखों में भी आज सावन उतर आया, ऐसा जननायक सदियों में एक ही कहलाएगा। परिचय :- आनंद कुमार पांडेय पिता : स्व. वशिष्ठ मुनि पांड...
वीर सपूत
कविता

वीर सपूत

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** आजादी के वीरों सपूतों का, आओ यश गान करें! श्रद्धासुमन अर्पित कर, उनका हम सम्मान करें !! कतरा-कतरा खून देकर, जो देश बचाया करते है..! ऐसे वीर सपूतों का, हम सब यश गाया करते है !! घर से दूर सरहद में रहकर, देश का गान करते है! सर्दी, गर्मी, बरसात सहकर, तिरंगे की मान रखते है !! दुश्मनों से लड़ते-लड़ते, जो वीर गति को पाते है! ऐसे वीर सपूत जग में, मरकर अमर हो जाते हैं..!! आओ मिलकर देशहित में, कुछ अच्छा काम करें! पेड़ लगाकर धरती में, वीरों के हम नाम करें..! राष्ट्रहित में मर मिटने को जीवन अर्पण करते है ! ऐसे वीर सपूतों का हम, शत-शत वंदन करते है..!! परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणि...
आधुनिक दरबार का तमाशा
कविता

आधुनिक दरबार का तमाशा

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** चारों तरफ धुआँ उठा है, तुम सिंहासन पर आँख मूँदे बैठे हो, राजकोष खाली पड़ा है, पर चेहरे पर शाही नूर ओढ़े बैठे हो, रंगमंच का वो मूक अभिनेता भी, तुमसे ज़्यादा समझदार निकला, तुम जलते हुए शहर में भी, जीत का जश्न साधे बैठे हो, शुक्र मनाओ इस बहरे दौर का, जिसने तुम्हें 'प्रधान' किया, वरना जनता के तीखे सवालों ने, कब का बेनकाब कर दिया होता, भूख की लंबी कतारों को, अब तुम 'अनुशासन की परेड' बताते हो, खाली पेट राष्ट्रवाद का राग फूंककर, तुम उत्सव मनाते हो, आईटी सेल के चारण-भाटों ने, तुम्हें एक ही मन्त्र सिखाया है, "साहेब अमर हैं", चाहे देश ने अपना सब कुछ गँवाया है, बेरोजगारी का ज्वर बढ़ा है? तो आंकड़ों से उसे डराओ तुम, संविधान की साँसें कम हैं? तो विज्ञापनों का ठहाका लगाओ तुम, नेताओं के चुनावी जुमलों पर, अब ...
अब सावन ये आया है
कविता

अब सावन ये आया है

डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' मंडला (मध्य प्रदेश) ******************** जेठ दुपहरी के दिन बीते, अब सावन ये आया है। काले काले इन मेघों ने, अमृत जल बरसाया है। वर्षा की नन्ही बूंदों ने, वसुधा को महकाया है। रीते-रीते नदी झरनों में, अब नीर भर आया है। पपीहा बोले मयूर नाचे, जंगल में उत्सव छाया है। जीर्ण शीर्ण इन वृक्षों में, नवपल्लव अब आया है। बारिश के इस मौसम ने, कृषकों को हर्षाया है। चूड़ी मेहंदी औ झूलों ने, गोरी को ललचाया है। मौन हुए अधरो ने अब, प्रेम रस छलकाया है। जेठ दुपहरी के दिन बीते, अब सावन ये आया है। परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल 'मृदुल' निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी ...
नीला अंबर नीला समंदर
कविता

नीला अंबर नीला समंदर

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अंबर को निहारते मैं खो गई। ईश्वर ने ऐसा विशाल बनाया, उसे सूर्य, चंद्र और तारों से सजाया। जगत पिता जैसे शिक्षा दे रहे, आकाश से अनंत विचारों को विस्तृत करो। समंदर को देखो, अथाह गहरा, परंतु अपने में, कितने ही अद्भुत जीवन समाये रखें। लहरें जब ऊंचाई को छूने लगे, उन्हें सीमा से बाहर न निकलें यह कहें। जैसे कह रहा हो कैसी भी हो, स्थिति, जीवन के क्रिया कलापों को सीमित सीमा में बांधे रखें। अंबर से विशालता और समंदर से गहराई सीखो। मन भंवरा है, उसे ईश्वर की कृतियों से प्रेरित होकर, सुंदर सुघढ़ भावों के संयम में रखना ही जीवनकी सुंदरता है। प्रकृति चित्रण कह रहा, अनंत, गहरे और संयमित रहो। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) सम्प्रति :...
सच है न
कविता

सच है न

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अरे नेताओ। समाजवाद का नारा लगाने वालों क्या तुम देख रहें हों या नहीं, नहीं जो जरा अपनी अट्टालिकाओ से थोड़ा, झुककर, देखो नीचे सुबह-शाम चारों पहर। विक्षिप्त, विकलांग, हाथ आगे पसारते हैं और, और कहते हैं ओ अट्टालिका के वासी तू, हां तू आत्मा के अधीन नहीं कुर्सी के अधीन है। क्या ये सच नहीं है सच है न। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच...
हम साहित्य के नये परिंदे हैं
कविता

हम साहित्य के नये परिंदे हैं

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** जान लें आप कि हम तो साहित्य के नये परिंदे हैं। मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। काव्य के प्रति अनुराग हमारा, अंतर्मन में हर्ष लिए। लेखन के प्रति नवल चेतना, हर पल ही संघर्ष लिए।। भले नये पर करें साधना, हमने लिखना जाना है। अनुशासन में रहते हैं नित, हमने सच पहचाना है।। हम वो नहीं हैं जिनके लिए साहित्य के फैले धंधे हैं। मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। लिखते भी हैं, पढ़ते भी हैं, उड़ना सीख रहे हैं। गिरते भी हैं-उठते भी हैं, लड़ना सीख रहे हैं।। सबके हित के भाव सँजोकर लिए चेतना हम भी। भले नये हैं, पर हैं चोखे, करें साधना हम भी।। साहित्य का मूल्य जानते हम, कदापि न हम अंधे हैं | मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।। कुछ वरिष्ठ आँखें दिखलाते, कहते मूरख हमको। कहते ...
गुरु जनो को प्रणाम
कविता

गुरु जनो को प्रणाम

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** ज्ञान गुरुओं से मिला बाँधे कैसे एक क़तार। मात, पिता प्रथम गुरु दूसरा यह संसार। पुस्तक ज्ञान शिक्षा से मिला शिक्षक बने आधार। लोकोक्तियाँ ज्ञान की पढ़कर अनुभव का पाया सार। पत्नी, बच्चों से गृहस्थ जीवन की कलपना हुई साकार। बन्धु बांधवों से मिला एकता का उपहार। मित्रों ने ख़ुशियाँ देकर सिखाया बाटों आपस मे प्यार। कार्य क्षेत्र ने दुनियादारी सिखाई करें कैसे व्यवहार। जीवन में सब गुरु हमारे करते सब का हम वन्दन। गुरु दक्षिणा मे सब को हमारा सादर नमस्कार। परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक : १४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन...
कंकर में शंकर
कविता

कंकर में शंकर

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** कंकर-कंकर में बसे, मां नर्मदा के शंकर। भक्तों के हृदयों में बसे, भोले डमरू वाले। शिव ही, सत्य अविनाशी। नर्मदा के हर कंकर बोले "ॐ नमः शिवाय" कंकर-कंकर में शिव का दर्शन। डमरू की धुन सुन, दुनिया सारी झूमे। भोले बाबा तेरी, लीला महिमा न्यारी। कंकर-कंकर में शंकर, श्रद्धा से सुमन चढ़ाते। ऊं नमः शिवाय कर भोले के गुणगान गाते। जो भी शरण में आते। बेड़ा पार लगाते। कंकर-कंकर में शंकर, मां नर्मदा के कंकर पूज्यनीय शंकर। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करव...