सच कहना है अब बुरा
निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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(दोहा उर्दू छंद)
सच कहना है अब बुरा, कहे यहाॅं सच कौन।
सच के दुश्मन हैं सभी, अच्छा है जो मौन।।
भूल गया है मौत को, लालच से मजबूर।
तन्हा जाना क़ब्र में, फिर भी करे ग़ुरुर।।
मेरी क्या पहचान है, ढूॅंड रहा मैं कौन।
दिखता जो वो मैं नहीं, अंदर कुछ है मौन।।
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
जीते जी का साथ है, मरने पर है भार।
चले सभी इस पार तक, चले नहीं उस पार।।
साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार।।
कुछ दिन का बस खेल है, मौत हॅंसे इक ओर।
बचना मुश्किल मौत से, लाख लगा ले जोर।।
कीड़े खाऍं क़ब्र में, जब तक रहे शरीर।
सोच वहाॅं तकलीफ़ में, कैसी होगी पीर।।
जिसके दिल में प्यार है, सही वही इंसान।
पत्थर दिल कुछ नफ़रती, घूम र...








