मंजिल की तलाश
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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मंज़िलों की तरफ, बढ़ना है अब हमें।
मुश्किलों से बहुत, लड़ना है अब हमें।
कैसी भी हो परेशानी, कठिनाई अब,
अपनी ज़िद पर शरद अड़ना है अब हमें।।
मंज़िलों की तरफ कूच करना ही है।
हर सफलता को अब नित्य वरना ही है।
हौसला सँग में होगा, तो हारूँ नहीं,
बनके जलधार हमको तो बहना ही है।।
आयें व्यवधान तो भी अडिग मैं रहूँ।
हर मुसीबत को मैं शौर्य से नित सहूँ।
नित्य चेहरे पे मुस्कानें खेलें सदा,
ले पराक्रम, सुसाहस, मैं मज़िल गहूँ।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/प्रभारी प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
प्रकाशित रचनाएं व गतिविधियां : पांच हज़ार से अधिक फ...

