महिला दिवस का पाखंड
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
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आइए! एक बार फिर
महिला दिवस का
पाखंड करते हैं,
महिला दिवस के नाम पर
औपचारिकता का
प्रपंच करते हैं।
रोज रोज महिलाओं का
अपमान करते हैं,
नीचा दिखाने का एक भी
मौका नहीं गँवाते हैं,
उनकी हर राह में
कांटे बिछाते हैं।
महिलाओं को
बराबरी का दर्जा देते हैं
पर सच तो यह है
कि हम सब अपनी माँ
बहन बेटियों को
भी ठेंगा दिखाते हैं।
नारी तू नारायणी है का
जितना गान करते हैं,
उससे अधिक हम उनका
अपमान करते हैं।
नारी के प्रति श्रद्धा के
दिखावे खूब करते हैं
बड़े बड़े भाषण, गोष्ठियां,
दिखावा करते हैं
पत्र पत्रिकाओं में
असंख्य लेख
कविता, कहानियां
भी लिखते हैं,
परिचर्चा, वैचारिक चिंतन
महिला हितों के नाम पर
सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं,
महिलाओं को साल में
इस एक दिन
महिला दिवस के नाम पर
सबसे ज्यादा बरगल...


