
सौ. निशा बुधे झा “निशामन”
जयपुर (राजस्थान)
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किसी क्या ‘फर्क’ पड़ता है।
क्या! पसंद हैं मुझे खास।
बोलना पसंद है। पर
चुप रहती आजकल।
सोचती हूँ सह जाऊँ
दर्द वो जमाने के, पर
क्या? करू वो भी तो
अपने हैं खास
पसंद में शामिल है। आज
नदी, पर्वत, मंद-मंद हवा
ये सब बेचेन है।
शोर बस मेरा ‘मौन’ हैं!
लिख देती हूँ।
कलम में भी तो आवाज़ हैं।
हलचल! अब कुछ कम है।
अब यहीं ‘मुझे पसंद है।
चारों ओर से आ रहीं कुछ
अनकही बातें,
जो न मैने कहीं और न
उसने सुनी वो बातें। फिर
फिर! क्यों
गरज रहें अपवादों के सायें
ये भी क्या? सही बात है।
पसंद हैं अपनी फिर क्यों!
होती इसी बात पर रोज तकरार हैं।
परिचय :- सौ. निशा बुधे झा “निशामन”
पति : श्री अमन झा
पिता : श्री मधुकर दी बुधे
जन्म स्थान : इंदौर
जन्म तिथि : १३ मार्च १९७७
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
शिक्षा : बी. ए. इंदौर/बी. जे. मास कम्यूनिकेशन, भोपाल
व्यवसाय : एनलाइन सेलर असेंबली /फ़िलिप कार्ड /अन्य
प्रकाशित पुस्तक : स्वयं की मराठी संकलन लघुकथा (मधुआशा 2024) एवं विभिन्न पटल पर पुरस्कार एवं समाचारपत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित स्वरचित कविता/कहानी इत्यादी।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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