
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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इस दुनिया में सिर्फ धोखा एवं धक्का ही मुफ्त में मिलता है, बाकी हर चीज की कीमत चुकानी पड़ती है। *देखिए हमारे देश की हालत- कचरा उठाने वाला अनपढ़ है और कचरा फेंकने वाले पढ़े-लिखे।* हर कोशिश में शायद सफलता नहीं मिल पाती है, लेकिन प्रत्येक सफलता का कारण कोशिश ही होती है। आपका लहज़ा बता देता है कि जुबान बोल रही है या पैसा। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि १०० में आने वाली पुलिस ११२ में आ रही है। कर्म वो चिठ्ठी है, जो कभी भी गलत पते पर नहीं पहुंचती है, जिसने भेजी है, उसी के पास लौटती है। *सुन लेने से कितने ही सवाल सुलझ जाते हैं और सुना देने से हम फिर वहीं उलझ जाते हैं।* अगर आप सोचते हैं, कि सब दु:ख दूर होने के बाद मन प्रसन्न होगा तो ये आपका वहम है…। मन प्रसन्न रखें, सब दु:ख स्वयं दूर हो जाएंगे। उन रिश्तों को टूटने दें, जिनकी वजह से आप टूट रहे हैं।
*ऊँचा उठने के लिए पँखों की जरूरत पक्षियों को पड़ती है, इंसान तो जितना नीचे झुकता है, उतना ही ऊपर उठता है।* इस दुनिया में कोई व्यस्त नहीं होता है, सारा खेल जरूरत और पसंद का है। एक औरत ने मंदिर में अपने पति के लिए मन्नत मांग कर धागा बांधा, फिर कुछ सोचकर एकदम से धागा वापस खोल दिया। पति ने इसका कारण पूछा तो पत्नी बोली-आपके लिए मन्नत मांगी थी, कि आपकी सारी मुसीबत दूर हो जाए। फिर खयाल आया कहीं मैं ही ना निपट जाऊँ। *शहर की खूबसूरत बात यह है, कि वहां के लोगों के सपनों में हमेशा गाँव आता है।* आत्मा की हत्या करके… अगर स्वर्ग भी मिले, तो वह नरक है। कुछ तूफान हमें मिटाने नहीं, बल्कि हमें हमारी ताकत याद दिलाने आते हैं।
*अगर आपको अपना दर्द बाँटना है तो सावधानी से बाँटिए, क्योकि ये रिकॉर्डिंग और स्क्रीन शॉट का जमाना है।* में जहर भी हूँ और शहद भी… स्वाद आपके व्यवहार पर निर्भर है। पत्नी से पीड़ित आदमी बाल कटवाने गया। नाई ने पूछा- साहब बाल कितने छोटे करूँ ? आदमी ने कहा- भाई इतने छोटे कर कि मेरी पत्नी के हाथों में ना आ सकें। कहते हैं कि दौलत साथ नहीं जाती, पर ये भी सच है कि मरते दम तक काम बहुत आएगी। *अक्सर ये देखा गया है कि अपनी खुद की पत्नी को छोड़कर पुरूष दूसरे की पत्नियों को क्यों देखते हैं ? क्योंकि हर आदमी दूसरे की गलती हमेशा पहले देखता है, अपनी नहीं।* अपनों के साथ आप चलें या न चलें, परन्तु अपनों के साथ चाल ना चलें।
*पहले मुझे अंधेरे से डर लगता था, फिर बिजली का बिल आया। बिल देखकर अब मुझे रोशनी से डर लगता है।* प्रेमी अपनी प्रेमिका से कह रहा था- मैं उस लड़की से शादी करूंगा, जो बढ़िया खाना बनाती हो, घर को साफ-सुथरा रखती हो और उसे सादगी पसंद हो। प्रेमिका ने उत्तर दिया- मेरे घर आना-हमारी नौकरानी में ये सारे गुण उपलब्ध है। सास और बहू में भयंकर लड़ाई हो गई। सास ने कहा- अगर मैं मर गई तो मेरी अर्थी को हाथ मत लगाना। बहू ने कहा- लगाऊँगी, हिम्मत हो तो उठ के रोक लेना। *पड़ोसन खाना बना रही थी और मैं गली से निकल रहा था। मैंने सीटी मार दी..! उसने कुकर उतार दिया-न मेरी दाल गली…न उसकी।*
अजीब जमाना आ गया है रेस्टॉरेंट वाले अपने बोर्ड पर लिखते हैं- ‘घर जैसा स्वाद’ और हमारी श्रीमती यू-ट्यूब पर सर्च करती है कि रेस्टारेंट जैसा खाना घर पर कैसे बनाएं। संस्कार से बढ़कर कोई वसीसत नहीं है और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं है। ज़िंदगी को इतना सीरियस लेने की जरूरत नहीं है साथियों, क्योंकि यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नहीं जाता। रिश्तों की कदर भी पैसों की तरह कीजिए, क्योंकि दोनों कमाना आसान है, लेकिन संभाल कर रखना मुश्किल है। *कुछ लोगों का साथ इसलिए छोड़ना पड़ता है, कि अगर नहीं छोड़ेंगे तो वे आपको कहीं का नहीं छोड़ेंगे।*
आज कहीं से आएगी अच्छी खबर,
किसी ने दी है मुझे ये अच्छी खबर।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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