
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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पत्नी ने घर में ज्यादा खाना बनाया तो पति ने पूछा कि घर में खाने वाले हम ३ लोग हैं, फिर तुमने ढेर सारा खाना किसके लिए बनाया है। पत्नी ने प्यारा-सा उत्तर दिया,- मुझे बचे हुए भोजन से विविध व्यंजन बनाने की विधि सीखनी है। आजकल की नौकरानी का हाल देखिए, मालकिन ने नई नौकरानी को समझाते हुए कहा, देख मैं ज्यादा बोलना पसंद नहीं करती। अगर में अंगुली का इशारा करूं तो समझ लेना कि में बुला रही हूँ। नौकरानी बोली,- मैडम मैं भी ज्यादा बोलना पसंद नहीं करती। अगर मैं सर हिला दूं तो आप समझ लेना कि मैं नहीं आ सकती।
*एक ६० साल की उम्र वाले व्यक्ति की टी शर्ट पर एक शानदार वाक्य लिखा था- मेरी उम्र ६० साल नहीं है, मैं तो केवल १६ साल का हूँ ४४ साल के अनुभव के साथ। इसे कहते हैं नजरिया।*
परमात्मा कभी किसी का भाग्य नहीं लिखता है, बल्कि जीवन के प्रत्येक मोड़ पर आपके कर्म और आपकी सोच से आपका भाग्य लिखते हैं। *पत्नी ने पति को किचन में स्वीट डिश बनाना सिखाई। पति ने पूछा- इसके बदले में तुमको क्या गुरु दक्षिणा दूँ ? पत्नी ने कहा- पड़ोसन को आज से तुम दीदी बोलना शुरू कर दो।*
घर में चाहे १० कमरे हों, पर रौनक उसी कमरे में होती है, जिसमें माँ होती है। २ चीजों का ध्यान हमेशा अपने जीवन में रखो-एक मति और दूसरी श्रीमती का। मति सही होगी तो ईश्वर भजन में लगे रहोगे और श्रीमती सही रहेंगी तो आपके खाने-पीने का इंतजाम होता रहेगा। एक ड्राइविंग स्कूल वाले ने अपने यहाँ बोर्ड लगाकर रखा था-बेकार कार चलाना सीखें।
*गांधी जी के ३ बंदर थे, अब तीनों को मिलाकर इस कलियुग में मोबाईल आ गया है। जब मनुष्य के हाथ में मोबाईल होता है, तो वो ना किसी से बोलता है, ना किसी को देखता है और ना किसी की सुनता है।* समझ में नहीं आता है कि गर्मी खून में ज्यादा है या जून में। *अगर खुश रहना है तो चुप रहना सीखिए, क्योंकि खुशियों को शोर पसंद नहीं है।* कुछ हासिल करने के लिए जरूरी नहीं है, कि हमेशा दौड़ा जाए। बहुत-सारी चीजें ठहरने से भी प्राप्त हो जाती है, जैसे-सुख, शांति और सुकून।
*पैसा आएगा, चला जाएगा, खुशियाँ आएंगी, चली जाएंगी, एक मोटापा ही सच्चा दोस्त है, जो आकर जाता नहीं है।* जीवन में भरोसा सब पर रखिए, परन्तु किसी के भरोसे मत बैठे रहिए। पूरी दुनिया का लिए आप एक इंसान हो सकते हैं, लेकिन अपनी माँ के लिए आप ही उसकी पूरी दुनिया हैं। *लोग ईश्वर से शिकायत करते हैं, ईश्वर ने आपका पेट भरने की जिम्मेदारी ली है, पेटियाँ भरने की नहीं।* भगवान ने पैसा भी क्या मस्त चीज बनाई है, बचपन में माँगना पड़ता है, जवानी में कमाना पड़ता है और बुढ़ापे में यहीं छोड़कर जाना पड़ता है। यदि ईश्वर का दर्शन और मित्र का मार्गदर्शन मिलता रहे, तो हमारा जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहेगा।
किसी की अंतिम यात्रा में जाओ तो ये मत समझना कि तुम उसे उसकी मंजिल पर ले जा रहे हो, बल्कि ये समझना कि अर्थी पर लेटा इंसान तुम्हें तुम्हारी मंजिल दिखाने ले जा रहा है। *’मतलब’ बहुत वजनदार होता है…,’ निकल जाने के बाद हर रिश्ते को हल्का कर देता है।* आजकल सबका यही हाल है खुद को क्या करना है, पता नहीं, मगर… दूसरों को क्या करना चाहिए, उसकी सलाह सबके पास है।
मैं उनके करीब रहता हूँ हमेशा, जो कभी मेरे से दूर नहीं रह सकते।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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