
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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*हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ? लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं।* शेर को पकड़ने के ३ तरीके हैं। (१) न्यूटन का तरीका- शेर को अपने पास आने दो जैसे ही हमारे पास आ जाए, उसे पकड़ लो। (२) आइंस्टाइन का तरीका-शेर का तब तक पीछा करो, जब तक कि वह थक न जाए, जैसे ही वह थक जाए, उसे पकड़ लो और अंतिम तरीका पुलिस का-खरगोश को पकड़ो और उसे तब तक पीटते रहो; जब तक कि वह स्वीकार न कर ले कि वही शेर है।
कलियुग चल रहा है गलत को गलत ही रहने दो। अगर गलत को गलत साबित करने जाओगे तो खुद ही गलत साबित कर दिए जाओगे। सुबह पत्नी चाय-नाश्ता पूछने आई तो मैंने कहा-बना दो। फिर रुक कर पूछने लगी- ये मोदी जी १ दिन में तीन देश कैसे घूम सकते हैं ? मैंने कहा- अगर बीवी साथ में न हो तो आदमी एक दिन में जाकर जाकर मास्को, काबुल और लाहौर घूमते हुए दिल्ली आ सकता है। वरना डी-मार्ट में ही शाम हो जाती है। बस उसके बाद न चाय आई, न नाश्ता। *अगर सोचना ही है तो कमाने की सोचो, जमाने की नहीं।* जब भी आपको सही सलाह की जरूरत हो तो हारने वालों से किया करें, जीतने वाले मुश्किलों के बारे में नहीं बताते हैं। *गंगा में वही पाप धुलते हैं, जो गलती से होते हैं। योजना बनाकर किए गए पाप लट्ठ से ही धुलते हैं।* शब्द और शस्त्र दोनों का उपयोग संभालकर कीजिए, क्योंकि शस्त्र से शरीर घायल होता है और शब्द से आत्मा घायल होती है। आशा और विश्वास हमेशा सोच-समझ कर लायक व्यक्ति पर करना चाहिए। *आजकल रिश्ते प्राईवेट जॉब की तरह हो गए हैं- बेहतर आफर मिलते ही लोग ‘चेंज’ कर लेते हैं।* अब तो भारतीय जीवन बीमा को एक नया बीमा प्लान लॉच करना चाहिए -‘हनीमून प्लस’, हनीमून के साथ भी, हनीमून के बाद भी। पेरेन्ट्स मीटिंग में पिता मैडम को बड़े ध्यान से देख रहा था, तो मैडम ने कहा-बस इतना ध्यान आपको अपने बच्चे पर देना है।
*नई नवेली बहू से सास ने कहा- मुझे जल्दी से पोता चाहिए। बहू भी हाजिर जवाब थी, उसने कहा-माँजी, अगर आप पहले बताती, तो मैं साथ लेकर आ जाती।* मौसम कितना भी बदल ले, परन्तु इंसान से ज्यादा बदलने का हूनर उसके पास नहीं है। अहंकार ऐसा मेहमान है, जो आता तो अकेले है, लेकिन जाते-जाते सब रिश्ते साथ ले जाता है। वक़्त बता सकता है, कि आपके पास कितनी दौलत है, लेकिन दौलत नहीं बता सकती कि आपके पास कितना वक़्त है। इसलिए मन से अमीर रहिए, धन का क्या है; आता-जाता रहता है।
दुनिया तुम्हें हमेशा गिरता हुआ देखकर खुश होगी और उठता हुआ देखकर जलेगी, इसलिए खुद के लिए जीना सीख लो। हमेशा समय की कद्र करो, क्योंकि एक बार बीता हुआ समय कभी वापस लौटकर नहीं आता। एक बात मुझे समझ में नहीं आती अगर बैडरूम में लाखों रूपए भी खर्च करें, तो भी उसको बैडरूम बोलते हैं; उसको गुड रूम क्यों नहीं बोलते। नींद पूरी होते ही दुकान और दुकान पूरी होते ही नींद, बस यही चल रहा है ज़िंदगी में। उत्तर दीजिए-देश में बलात्कार कैसे रूकेगा? गांधी के चरखे से अम्बेडकर के संविधान से या गोडसे की गोली से? पहले खून के रिश्ते रोते थे, अब रिश्तों का खून हो रहा है।
इस दुनिया में कोई दूध का धुला नहीं है। इस दुनिया में कर्म सबके होते हैं। फर्क इतना है कि किसी के ‘छुप’ जाते हैं, और किसी के ‘छप’जाते हैं। हर पेड़ फल दे, यह जरूरी नहीं किसी की छाया भी बड़ा सकून देती है। ईश्वर जिनको रिश्ते में बाँधना भूल जाता है उन्हें दोस्त बना देता है। परिस्थितियों के अनुसार हर चीज सुंदर है, जो स्कूल की घंटी सुबह के समय बेकार लगती है, वही छुट्टी के समय बहुत अच्छी लगती है। रिश्ते और पौधे दोनों एक जैसे होते हैं -लगाकर भूल जाओ तो दोनों सूख जाते हैं। अपनी निजी ज़िंदगी को एक बंद किताब की तरह रखिए, क्योंकि खुले पन्नों को लोग अक्सर फाड़कर फेंक देते हैं।
पता नहीं कैसे परखता है मेरा भगवान मुझे, इम्तिहान भी मुश्किल लेता है, और फेल भी नहीं होने देता है।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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