
शिवराज आनंद
सोनपुर, सूरजपुर (छत्तीसगढ़)
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माँ! हम आए तेरी शरण में,
नित छुएँ चरण,
मम निवेदन स्वीकार करो!
है यही भाव-भजन,
मन लगी लगन,
मम-जीवन निर्माण करो!
हम सब बाल-पौधे माँ!
तू माँ- माली साथ है।
तू जननी! हम लाल,
सब तेरे हाथ हैं॥
जग सृजनी! दे
तू जैसी आकृति,
सब तेरा उपहार है।
हम सब कच्ची मिट्टी,
तू सबका कुंभकार है॥
तू भू की रानी, तू
अम्बर की न्यारी माँ।
तुझमें बसी दुनिया सारी,
तुझसे तर दुनिया सारी।
हे स्नेहमयी माँ!
तेरी गोद में हम हैं सोए,
तुझ संग मिलकर हम हैं रोए।
तेरे आँचल में हमने खेला!
तेरे आँचल में हमने खाया!
तूने हमें कहा-आँखों का तारा!
हमने तुझे कहा-ध्रुव का तारा!!
राम-कृष्ण, भीष्म-
युधिष्ठिर तूने बनाया॥
सच है कि कर्ण-अर्जुन,
बुद्ध-महावीर तूने ही बनाया।
तेरी महिमा अपार माँ!
तेरी महिमा अपार।
हे नित्य माता! तूने ही
शंकर-रामानुज,
गाँधी-मालवीय, हिय का
अमिय-रस पिलाया॥
तेरी महिमा अपार माँ!
तेरी महिमा अपार…
हे माँ! हमें भी शरण दो,
मन की कुबुद्धि हर दो।
हे वरदायिनी वर दो,
जीवन धीर-वीर कर दो।
माँ! मेरे जीवन की
बगिया नित्य खिलती रहे।
तुझसे बनी साँस
की डोर चलती रहे॥
माँ! तू बस इतना
करम कर दे,
निज वत्स का इतना
धरम कर दे।
हम झुकाएँ शीश,
तू हमें शुभाशीष दे-दे॥
जन्म स्थान : सोनपुर जिला- सूरजपुर (छत्तीसगढ़)
जन्म तिथि : ०४ मई १९८७
पिता : विश्वनाथजी
माता : पार्वती देवी
धर्म पत्नी : कृष्णी कुमारी
शिक्षा : एम् ए (हिंदी भाषा)
व्यवसाय : लेखक, कवि
रुचि : साहित्य के प्रति, पढ़ना, लिखना, खेलना
अनुभव : दो दशक से साहित्य लेखन
विधा : गद्य और पद्य
साहित्य कृतियां : जीवन की सोच, मेरी आवाज, जिओ उनके लिए, मां की महिमा, प्रेम-जगत, हम कलियुग के प्राणी हैं, घर का भेद, जगत का जंजाल-संसृति, यहां उनका भी दिल जोड़ दो, उठो युवा तुम उठो ऐसे, मानवता के डगर पे, बेवफा अपनों के लिए, सोनपुर महिमा।
सम्मान : राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान २०२०, सच की दस्तक(राष्ट्रीय मासिक पत्रिका) द्वारा’उत्कृष्ट लेखन सम्मान २०२०, फेस ऑफ इंडिया अवार्ड २०२१, नेशनल आइकन अवार्ड २०२२, श्री राघव सामान २०२४, अंतर्राष्ट्रीय आइकन अवार्ड २०२५, २० जुलाई २०२६ को आडिटोरियम भवन सूरजपुर में आज की जनधारा अखबार के कार्यक्रम में सम्मानित, स्मृति चिन्ह, न्य कई साहित्य पत्रिकाओं में रचना का प्रकाशन, साहित्यपीडिया में। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग में पंजीयकृत। )
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