
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मैया छूट जाए संसार,
मगर तेरा साथ नहीं छूटे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया तेरा प्यार नहीं रुके।।टेक।।
बचपन बीता, यौवन आया,
प्रीतम के संग घर बसा लिया।
मैया सिर पे रहे, तेरा हाथ,
भवानी तेरा संग नहीं छूटे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया तेरा प्यार नहीं रूठे।
बाबुल छोड़े, माता छोड़ी,
मैंने छोड़ा बाबुल का कंगना
मैया ना बिसरी तेरी याद,
और तेरा हाथ नहीं छूटे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया तेरा प्यार नहीं रुके।
जीवन के सफर में सब ही मिले,
पापी भी मिले, धर्मी भी मिले।
दुष्टों ने किया क्या हाल,
हो मैया मेरा प्यार तुझे ढूंढे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया प्यार नहीं रुठे।
कर्तव्यों की अग्नि, यूं जली,
भावों की आहूती, ले ली।
मुझे बना दिया रे महाकाल,
हो मैया तेरी शरण नहीं छूटे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया तेरा प्यार नहीं रुठे।
“आशा” का दीपक हाथ लिए,
बैठी हूं दर पे आस लिए।
करो धर्म की रक्षा आज,
भवानी तेरी आन नहीं टूटे।
मैया छूट जाए संसार
मगर तेरा साथ नहीं छूटे।
मैं तो मांगूं यही दिन रात,
हो मैया तेरा प्यार नहीं रुठे।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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