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हां तुम

बाल कृष्ण मिश्रा
रोहिणी (दिल्ली)
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हां तुम !
मैंने चाहा है तुमको
मेरी चाहतों में तुम I
गुजरे कल में तुम
उगते सूरज में तुम I
बहती हवाओं में तुम
बरसते बादलों में तुमI
खिलते फूलों में तुम
ढलती शामों में तुम I
हां तुम !

मन की सुंदरता
तन का सुंदर रूप I
लब तेरे मधुशाला
हर अंग पुष्प की माला
स्वप्न की परी तुम
हो यौवन रस का अमृत प्याला I

तुम जीवन ज्योति
तुम करुणा तुम भक्ति
तुम ही मेरा बंधन I

मेरा इश्क तुम
मेरी जान तुम
मेरा हर लम्हा तुमसे
तुम ही मेरा दर्पण I

बेचैन दिल तन्हा मन
तस्वीर तेरी चूमते नयन I
मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे
जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I

मेरा ख्वाब मेरी हकीकत
मेरी चाहत मेरा जूनू
हां तुम !

परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा
निवासी : रोहिणी, (दिल्ली)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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