
सुधीर श्रीवास्तव
बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश)
********************
कुण्डलिया छंद
सबसे ज्यादा आजकल, अपने लगते भार।
कलयुग का यह सार है, लगभग हर परिवार।
लगभग हर परिवार, सुनें हम यही कहानी।
सभी सुनाते आज, कथाएं आप जुबानी।
कहें मित्र यमराज, शिकायत नहीं किसी से।
सभी दुखी हैं आज, मगर हम अच्छे सबसे।।
अंर्तमन की पीर का, होता गहरा घाव।
आज छोड़कर कल उसे, आप दीजिए भाव।
आप दीजिए भाव, रंग चेहरे मत लाना।
नाहक उसको आज, नहीं दो पानी दाना।
इसका रौरव छंद, तोड़ देता है हर तन।
कहें मित्र यमराज, गजब होता अंर्तमन।।
दिखता है दृश्यमान जो, करता सबको तंग।
जो हो रहा समाज में, आज बहुत बदरंग।।
आज बहुत बदरंग, जमाना कैसा आया।
कलयुग के दौर ने, जगत को है भरमाया।।
कहें मित्र यमराज, सत्य भी खूब है बिकता।
मान लीजिए आप, झूठ ही आगे दिखता।।
आया मुश्किल समय है, होते सब बेहाल।
सूर्यदेव इतने कुपित, तपन हुई विकराल।।
तपन हुई विकराल, हमें भी तो समझा दो।
या लाकर चुपचाप, एक बोतल पकड़ा दो।
कहें मित्र यमराज, शर्म आती है भाया।
गर्मी का यह रूप, आप से मिलने आया।।
बनते न्यायाधीश जो, होते नहीं महान।
संविधानक्ष की पालना, रखें ईश का ध्यान।।
रखें ईश का ध्यान, न्याय के जो अनुरागी।
नीति नियम सिद्धांत, बने रहते बिरहागी।
कहें मित्र यमराज, धर्म का पोषण करते।
तब जाकर कुछ लोग, योग्य तब इसके बनते।।
तुमको जो अच्छा लगा, किया वही हर काम।
और मुफ्त में हो गए, घर बैठे बदनाम।।
घर बैठे बदनाम, पीटते अब क्यों माथा।
करते जिन पर नाज, आज कोई ना साथा।
कहें मित्र यमराज, बुलाओ इनको उनको।
हम भी देखें आज, यहाँ जो लाए तुमको।।
ऐसे भी कुछ लोग हैं, नहीं आस्था ज्ञान।
कुंठा में हैं जी रहे, बनते बड़े महान।।
बनते बड़े महान, लगाकर वे खुश होते।
नहीं समझते आज, उड़ेंगे इक दिन तोते।
कहें मित्र यमराज, बनो मत इनके जैसे।
ये सब हैं बेशर्म, रहेंगे बिल्कुल ऐसे।।
आस्था के साथ अब क्यों, खेल रहे हैं लोग।
या फिर इन सबको मिला, जन्मजात ये रोग।।
जन्मजात ये रोग, दवा अब बहुत जरूरी।
मान लीजिए आप, भले ही हो मजबूरी।
कहें मित्र यमराज, बढ़ाओ सब मिल हाथा।
तभी बचेगी लाज, सत्य जब होगी आस्था।।
परिचय :- सुधीर श्रीवास्तव
जन्मतिथि : ०१/०७/१९६९
शिक्षा : स्नातक, आई.टी.आई., पत्रकारिता प्रशिक्षण (पत्राचार)
पिता : स्व.श्री ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव
माता : स्व.विमला देवी
धर्मपत्नी : अंजू श्रीवास्तव
पुत्री : संस्कृति, गरिमा
संप्रति : निजी कार्य
विशेष : अधीक्षक (दैनिक कार्यक्रम) साहित्य संगम संस्थान असम इकाई।
रा.उपाध्यक्ष : साहित्यिक आस्था मंच्, रा.मीडिया प्रभारी-हिंददेश परिवार
सलाहकार : हिंंददेश पत्रिका (पा.)
संयोजक : हिंददेश परिवार(एनजीओ) -हिंददेश लाइव -हिंददेश रक्तमंडली
संरक्षक : लफ्जों का कमाल (व्हाट्सएप पटल)
निवास : गोण्डा (उ.प्र.)
साहित्यिक गतिविधियाँ : १९८५ से विभिन्न विधाओं की रचनाएं कहानियां, लघुकथाएं, हाइकू, कविताएं, लेख, परिचर्चा, पुस्तक समीक्षा आदि १५० से अधिक स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। दो दर्जन से अधिक कहानी, कविता, लघुकथा संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन, कुछेक प्रकाश्य। अनेक पत्र पत्रिकाओं, काव्य संकलनों, ई-बुक काव्य संकलनों व पत्र पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल्स, ब्लॉगस, बेवसाइटस में रचनाओं का प्रकाशन जारी।अब तक ७५० से अधिक रचनाओं का प्रकाशन, सतत जारी। अनेक पटलों पर काव्य पाठ अनवरत जारी।
सम्मान : विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा ४५० से अधिक सम्मान पत्र। विभिन्न पटलों की काव्य गोष्ठियों में अध्यक्षता करने का अवसर भी मिला। साहित्य संगम संस्थान द्वारा ‘संगम शिरोमणि’सम्मान, जैन (संभाव्य) विश्वविद्यालय बेंगलुरु द्वारा बेवनार हेतु सम्मान पत्र।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻






